मेरी जगह अब मेरे छोटे भाई डॉ. दिनेश अंबाशंकर उपाध्याय काशी करवत के महंत होंगे। इस घटनाक्रम में मैं निजी तौर पर किसी को भी दोषी नहीं मानता। यह सब दैवीय विधान मानकर भीमेश्वर प्रभु के ऊपर छोड़ दिया है।
गणेश शंकर उपाध्याय ने कहा कि मेरे पिता महंत पं. अंबाशंकर उपाध्याय ने अपना पूरा जीवन एक धर्म योद्धा की तरह बिताया। उन्होंने कहा कि नौ साल के कार्यकाल में कई समस्याएं और अस्तित्व का संकट आया। जिन्हें मैंने अपने धर्म के रास्ते पर चलते हुए स्वीकार किया और भगवान भीमेश्वर प्रभु की कृपा से कभी विचलित नहीं हुआ।