प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं।हरिश्चंद्र घाट पर काशी के विद्वानों की उपस्थिति रही। इस दौरान प्रो. भगवत शरण शुक्ल, प्रो विजय शंकर शुक्ल, प्रो रामनारायण द्विवेदी सहित अनेकों विद्वान रहें। उन्हें सबसे युवा साहित्यकार का राष्ट्रपति पुरस्कार 1979 में मिला था। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से विश्व भारती सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। राष्ट्र की तमाम संस्थाओं ने अनेक पुरस्कारों से पुरस्कृत किया।
पंडित द्विवेदी को आधुनिक महाकवि कालिदास की उपाधि से अलंकृत किया गया था। काशी विद्वत परिषद को उन्होंने बौद्धिक ऊंचाई दी। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर राम यत्न शुक्ल ने कहा कि आज प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी के जाने से संस्कृत का दैदीप्यमान नक्षत्र चला गया। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री राम नारायण द्विवेदी ने कहा कि रेवा प्रसाद द्विवेदी ने जो काम किया है संस्कृत साहित्य के लिए वह आज के विद्वानों के लिए धरोहर है। अभिनव संस्कृत साहित्यस्थापना के लिए उन्होंने कार्य किया है, अब वह कार्य अधूरा रह जाएगा। उनके जाने से क्षति हुई है भगवान उनके परिवार को इस शोक संवेदना सहन करने की क्षमता दे। पूरे काशी में संस्कृत में एक शोक की लहर व्याप्त हो गई है।