प्रो. द्विवेदी 1950 में मध्य प्रदेश से काशी आए थे। उनका जन्म स्थान मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का नांदेड गांव है। नवीन साहित्य शास्त्र की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. राम यत्न शुक्ल ने कहा कि आज प्रो. रेवाप्रसाद द्विवेदी के जाने से संस्कृत का दैदीप्यमान नक्षत्र चला गया।
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री राम नारायण द्विवेदी ने कहा कि रेवा प्रसाद द्विवेदी ने जो काम किया है संस्कृत साहित्य के लिए वह आज के विद्वानों के लिए धरोहर है। अभिनव संस्कृत साहित्य स्थापना के लिए उन्होंने कार्य किया है अब वह कार्य अधूरा रह जाएगा। उनके जाने से क्षति हुई है भगवान उनके परिवार को इस शोक संवेदना सहन करने की क्षमता दे। पूरे काशी में संस्कृत जगत में एक शोक की लहर व्याप्त हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट के जरिए पं. द्विवेदी के निधन पर शोक जताते हुए परिवार को सांत्वना दी है। शनिवार को पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि संस्कृत की महान विभूति महामहोपाध्याय पं. रेवा प्रसाद द्विवेदी जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है। उन्होंने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई प्रतिमान गढ़े। उनका जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में उनके परिजनों और प्रशंसकों को मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!