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महाशिवरात्रिः आज देर रात काशीपुराधिपति बन जाएगें गृहस्थ, रजत प्रतिमा विराजेगी गर्भगृह में

Fri, 21 Feb 2020 07:15 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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महंत आवास में विराजी बाबा की रजत प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला।
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सात वार नौ त्योहार वाली काशी में महाशिवरात्रि का मौका सबसे खास होता है। अड़भंगी शिव भी भक्तों के प्रेम में रातभर जागते हैं। बाबा विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती के बाद से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला अनवरत चलता रहा। हालांकि कुछ सालों के मुकाबले इस बार मंदिर में भक्तों की संख्या कम नजर आई। महाशिवरात्रि पर पहली बार झांकी दर्शन की व्यवस्था से श्रद्धालुओं में निराशा रही।

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मंदिर प्रशासन का दावा है कि दोपहर 12 बजे तक एक लाख और शाम छह बजे तक दो लाख भक्तों ने दर्शन किए। वहीं मारकंडेय महादेव में तीन लाख से अधिक भक्तों ने जलाभिषेक किया। दोपहर से ही शहर से लेकर गांव तक में शिव बारात निकलने का सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। वाराणसी के सोनारपुरा, जंगमबाड़ी, सारनाथ, हरिशचंद्र, तिलभांडेश्वर, मैदागिन, गोदौलिया, चौक आदि क्षेत्रों में शिव की अड़भंगी बारात निकाली गई। काशीपुराधिपति के विवाह की रस्में देर रात मंदिर परिसर में निभाई जाएगीं। महंत आवास पर बाबा की रजत प्रतिमा के साथ सारी परंपराओं को निभाया जाएगा। इसके बाद बाबा की प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित होगी।

महाशिवरात्रि पर शुक्रवार की सुबह 45 मिनट पूर्व बाबा की मंगला आरती 2:15 बजे शुरू हुई। मंदिर परिसर टिकट धारियों से भरा हुआ था। आरती समाप्त होने के 25 मिनट बाद 3:55 बजे मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। बाबा के भक्त दर्शन के लिए रात से ही कतार में लगे हुए थे। भीड़ को देखते अधिक से अधिक भक्तों को दर्शन कराने के लिए तीन तरफ से प्रवेश और दो तरफ से निकासी की व्यवस्था की गई थी।
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मारकंडेय महादेव मंदिर में दर्शन के लिए लगी भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को गेट नंबर एक ढुंढिराज गणेश, छत्ताद्वार से, गेट नंबर पांच अपारनाथ मठ के सामने से प्रवेश कराया जा रहा था। झांकी दर्शन के बाद श्रद्धालु गेट नंबर तीन नीलकंठ और गेट नंबर दो सरस्वती फाटक से निकल रहे थे। सुबह भक्तों की कतार ज्ञानवापी से होते हुए चौक थाने से आगे मैदागिन को छू रही थी तो दूसरी कतार बांसफाटक, गोदौलिया से होते हुए दशाश्वमेध, गिरजाघर से मजदा तक पहुंच गई। 11 बजे तक चौक की तरफ से आने वाली श्रद्धालुओं की कतार सामान्य हो गई।

श्रद्धालुओं को मिली राहत

मंदिर प्रशासन की ओर से दिव्यांग और बुजुर्गों को सीधे गेट नंबर एक से प्रवेश दिया जा रहा था। बुजुर्गों के लिए मंदिर प्रशासन की तरफ से व्हील चेयर की व्यवस्था की गई थी। जगह-जगह श्रद्धालुओं को पानी पिलाने की व्यवस्था की गई थी। चिकित्सा व्यवस्था का भी इंतजाम मंदिर प्रशासन की ओर से चौक और गोदौलिया पर किया गया था। इस दौरान काफी संख्या में चोटिल और बीमार भक्तों का इलाज किया गया।

श्रद्धालुओं से करें मानवीय व्यवहार

कंट्रोल रूम से महाशिवरात्रि पर भक्तों के साथ मानवीय व्यवहार करने का संदेश गूंजता रहा। एसपी ज्ञानवापी सुकीर्ति माधव मिश्रा लगातार चक्रमण करते रहे।

सामाजिक संस्थाओं ने निभाई भागीदारी

शिवभक्तों की सेवा में बुलानाला से गोदौलिया तक दर्जन भर स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी योगदान किया। कोई भक्तों को चाय पिला रहा था तो कोई फलाहार करा रहा था। कोई पानी लेकर लगातार भक्तों को पिलाने में लगा हुआ था।

शिवभक्तों के पैरों में चुभे शूल

गोदौलिया से दशाश्वमेध मार्ग खराब होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ी। प्रशासन ने मंदिर में प्रवेश वाले रास्ते पर तो रेडकार्पेट बिछवाया था लेकिन निकास मार्ग खराब होने के कारण नंगे पैर पहुंचे श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ी। खराब रास्ते में पड़े हुए छोटे-छोट पत्थर पैरों में चुभ रहे थे। गोदौलिया से दशाश्वमेध की तरफ जाने वाले भक्त प्रशासन को कोसते रहे।
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