उन्होंने बताया कि 2004 में मुझे अजीबो गरीब सपने आते थे। सपने में अक्सर एक मंदिर नजर आता था जहां मैं पूजा करती थी। बनारस में घर बन गया और उसके सवा महीने बाद आसपास के लोगों के घरों में कई मौतें हुईं। यहां तक हादसे में मेरे पति की भी मौत हो गई। कई सारे अपशकुन होते थे। मेरे मन में विचार आया कि गणेशपुर में शिव का मंदिर बनाया जाए तो इस पर कालोनी वालों ने भी सहमति जताई। ईश्वर की कृपा से दो बेटियां हैं। एक इंजीनियर और दूसरी बड़ी कंपनी में मैनेजर है।
सहयोग से मिली मदद
मंदिर बनाने में साथी वकीलों और जनसहयोग के साथ खुद के पैसे से मदद मिली। संकटमोचन मंदिर के महंत स्व. वीरभद्र मिश्र ने 8 मार्च 2004 को मंदिर का शिलान्यास कराया। मंदिर में शिव परिवार सहित मूर्ति एवं शिवलिंग दोनों स्थापित है। सावन, शिवरात्रि पर विशेष पूजन किया जाता है। हर सोमवार को महिलाएं मंदिर में भजन व पूजा करती हैं।