मुन्ना बजरंगी की हत्या के तार पूर्वांचल से भी जुड़ रहे हैं। पुलिस और एसटीएफ बजरंगी के धुर विरोधियों का मर्डर कनेक्शन खंगाल रही है। सूत्रों के अनुसार जल्दी ही एक टीम बनारस और जौनपुर आएगी।
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मुन्ना बजरंगी राजनीति से जुड़े चर्चित शख्सों की हत्या के कारण शुरू से सफेदपोश रसूखदारों के निशाने पर रहा है। बजरंगी की अदावत जगजाहिर थी और बीच-बीच में वो इसे लेकर अदालत में गुहार भी लगाता रहता था। उसकी पत्नी सीमा भी कई बार बजरंगी की जान को खतरे की आशंका जताते हुए शासन और प्रशासन से सुरक्षा के मुकम्मल इंतजाम की मांग कर चुकी थी।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुरुआती तफ्तीश में यही सामने आया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में लंबे समय से पैठ बनाए और वहां के गैंगेस्टर से करीबी ताल्लुकात रखने वाले लोगों ने ही हत्या की साजिश रची थी।
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पुलिस डोजियर के अनुसार बजरंगी गैंग का कार्यक्षेत्र जौनपुर, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, गोरखपुर, लखनऊ, नई दिल्ली, मुंबई, मध्य प्रदेश और हरियाणा तक रहा है। बजरंगी और उसके गिरोह से जुड़े सदस्यों पर इन सभी जिलों और प्रदेशों में गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज है।
मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह पर भी दो मुकदमे दर्ज हैं। दोनों मुकदमे 2013 में शिवपुर थाने में दर्ज किए गए थे। सीमा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, बलवा, धमकी सहित अन्य आरोप हैं और दोनों मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं।
जेलों में कैद चर्चित नामों की धुकधुकी बढ़ी
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश की जेलों में मुन्ना बजरंगी की तरह पूर्वांचल के कई चर्चित नाम कैद हैं। इनमें से एमएलसी बृजेश सिंह शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल में और उनका करीबी त्रिभुवन सिंह मिर्जापुर जेल में निरुद्ध है। आगरा जेल में मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी निरुद्ध हैं। वहीं, सुभाष ठाकुर फतेहगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में मिर्जापुर जेल में चंदौली का निलंबित एआरटीओ आरएस यादव निरुद्ध है।
सूचीबद्ध आठ शरणदाताओं पर पुलिस की निगाह
मुन्ना बजरंगी और उसकी गैंग के शरणदाताओं के तौर पर पुलिस ने आठ लोगों का सूचीबद्ध कर रखा है। इसमें से पहला नाम मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी का है।
इसके अलावा जौनपुर के सुरेरी थाना के पुरेदयाल (कसेरू), नेवढ़िया थाना के बेनीपुर, बरसठी थाना के कुसा, सिकरारा थाना के कसनही, बदलापुर थाना के रूपचंद्रपुर और बक्सा थाना के चितौड़ी गांव निवासी सात लोग हैं। इन सभी की गतिविधियों पर पुलिस निगाह रखे हुए है।
माफिया से माननीय बनने की हसरत रह गई अधूरी
- फोटो : अमर उजाला
बजरंगी की माफिया से माननीय बनने की हसरत अधूरी रह गई। बजरंगी 29 अक्तूबर 2009 को मुंबई के मलाड इलाके से नाटकीय घटनाक्रम के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसने बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की तरह राजनीति में किस्मत आजमानी चाही लेकिन सफल नहीं हुआ।
2012 में बजरंगी जौनपुर की मड़ियाहूं विधानसभा से चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। इसके बाद 2017 में उसने पत्नी सीमा सिंह को विधानसभा का चुनाव लड़ाया लेकिन सफलता नहीं मिली।
मौत को एक बार मात देे चुका था बजरंगी
बजरंगी सितंबर, 1998 में दिल्ली और यूपी पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई मुठभेड़ में मौत को मात दे चुका था। मुठभेड़ में मुन्ना को मार गिराए जाने का दावा पुलिस की ओर से किया गया लेकिन अस्पताल पहुंचा तो उसने आंखें खोल दी और डॉक्टरों के प्रयास से वह बच गया। बताया जाता है कि मुठभेड़ में बजरंगी के शरीर पर दर्जन भर गोली लगी थी।
डिप्टी जेलर की डांट से नाराज होकर करा दिया था हत्या
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वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी ने बजरंगी को डांट दिया था तो 2013 में उसने उनकी हत्या करा दी थी। यह खुलासा धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड के आरोपी चंदन सिंह ने 2017 में एसटीएफ के सामने किया था।
बताया जाता है कि जिला जेल के निरीक्षण के दौरान पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियोें से बजरंगी को बहस करता देख डिप्टी जेलर ने उसे अन्य बंदियों के सामने फटकारते हुए कस कर डांट दिया था। इसके साथ ही औकात मेें रहने को कहा था।
इसे बजरंगी ने अपने अपमान समझा और डिप्टी जेलर की हत्या की साजिश रचा। 23 नवंबर 2013 को डिप्टी जेलर भोजूबीर स्थित जिम रोजाना की तरह गए तो बजरंगी के गुर्गों ने उनकी हत्या कर दी। डिप्टी जेलर की हत्या में पुलिस ने मऊ निवासी बदमाश रमेश सिंह काका की भी अहम भूमिका बताई थी।
छोटे सिंह-बड़े सिंह हत्याकांड से बनारस में हुआ चर्चित
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6 जून 1995 को कैंट थाने के खजुरी इलाके में राजेंद्र सिंह और कृष्ण कुमार सिंह की हत्या की गई थी। छोटे सिंह-बड़े सिंह हत्याकांड के नाम से चर्चित इस वारदात का अहम आरोपी बजरंगी था। मौजूदा समय में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार छोटे सिंह-बड़े सिंह हत्याकांड के बाद बनारस और पूर्वांचल के माफिया गुटों में बजरंगी की एक अलग पहचान बनी और उसे गंभीरता से लिया जाने लगा। इसके बाद बजरंगी ने पूर्वांचल भर के डॉक्टरों, कारोबारियों और ठेेकेदारों से रंगदारी वसूलना शुरू किया।
रंगदारी देने से मना करने पर बजरंगी के गुर्गे फायरिंग कर या तो डराते थे या फिर हत्या कर देते थे। इसी तरह वर्ष 2002 में मार्च महीने में दशाश्वमेध क्षेत्र में व्यापारी सुरेश चंद्र साहू, मई में सेनपुरा मेें व्यापारी लक्ष्मण सेठ और फिर दिसंबर महीने में मलदहिया चौराहा के समीप अनिल राय की हत्या ने बजरंगी और उसके गिरोह को मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के करीब ला दिया।