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लाखों की मशीनरी, सुरक्षा भगवान भरोसे: डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट के सीवेज पंपिंग सेट की छत पर खड़ा हो रहा ठेला

Mon, 10 Aug 2026 06:41 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट स्थित सीवेज पंपिंग सेट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि पंपिंग सेट की छत पर ठेला खड़ा कराया जा रहा है, जबकि गेट के बाहर खाली जगह वाहन स्टैंड बन गई है। लाखों की मशीनरी वाले परिसर में अनधिकृत गतिविधियों से हादसे और मशीनों को नुकसान की आशंका है।
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सीवेज पंपिंग सेट की छत पर खड़ा ठेला। - फोटो : संवाद
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Dr. Rajendra Prasad Ghat Sewage Pumping Plant: डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट स्थित सीवेज पंपिंग सेट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां कर्मचारियों की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। पंपिंग सेट की छत पर ठेला खड़ा करवाया जा रहा है। इतना ही नहीं, मुख्य गेट के बाहर दाहिनी ओर खाली पड़ी जगह को भी वाहन स्टैंड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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सीवेज पंपिंग सेट में लाखों रुपये की महत्वपूर्ण मशीनरी लगी है। यह मशीनरी शहर की सीवेज व्यवस्था के लिए अहम है। ऐसे संवेदनशील परिसर में बाहरी लोगों और वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पंपिंग सेट की छत पर ठेला खड़ा होने का मामला लंबे समय से चल रहा है और जिम्मेदार कर्मचारियों की नजर के बावजूद इस पर रोक नहीं लगाई गई।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंपिंग सेट पर तैनात कर्मचारी परिसर की निगरानी और सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। आरोप है कि कर्मचारी अक्सर अंदर आराम करते नजर आते हैं। इसी वजह से परिसर के आसपास अनधिकृत गतिविधियां बढ़ रही हैं। गेट के बाहर वाहनों के खड़े होने से जहां रास्ते पर अव्यवस्था पैदा हो रही है, वहीं पंपिंग सेट के भीतर लगी मशीनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

लोगों का कहना है कि सीवेज पंपिंग सेट कोई सामान्य सार्वजनिक स्थान नहीं है। यहां तकनीकी उपकरण और महत्वपूर्ण मशीनें लगी हैं। किसी बाहरी व्यक्ति की अनियंत्रित आवाजाही या लापरवाही से मशीनों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे सीवेज व्यवस्था प्रभावित होने के साथ बड़ा हादसा भी हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से पंपिंग सेट का निरीक्षण कराने और परिसर में ठेला व वाहनों के खड़े होने पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही कर्मचारियों की ड्यूटी और निगरानी व्यवस्था की जांच कराने की भी मांग उठी है। अब देखना है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।
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