यम पंचक लगने के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत काशी में स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन से आरंभ होगी। धनतेरस के दिन 17 अक्तूबर को मां के स्वर्णिम स्वरूप का दर्शन होगा। इसी के साथ चार दिन तक देवी के कपाट आम भक्तों के लिए खुले रहेंगे।
इसी के साथ पांच दिवसीय दीपदान का पर्व आरंभ हो जाएगा। काशी में वर्ष में सिर्फ एक बार धन तेरस पर स्वर्णमयी अन्नपूर्णा का दरबार भक्तों के लिए खोला जाता है।विश्वनाथ मंदिर से लगे अन्नपूर्णा मंदिर की पहली मंजिल पर जगत प्रतिपालिका का सोने का विग्रह विराजित है।
धनतेरस के दिन सुबह षोडशोपचार पूजन के बाद मां की महा आरती होगी। नोटों की गड्डियों के अलावा सोने, चांदी, हीरे, मोती समेत अन्य रत्नों के आभूषणों के साथ मां की सविधि पूजा होगी। इसके बाद भक्तों के लिए मंदिर का पट खोल दिए जाएंगे।
भोग आरती के समय आधे घंटे के लिए मंदिर का पट बंद रहेगा। भोग आरती के बाद 12:30 बजे से फिर दर्शन शुरू होगा जो रात 11 बजे तक जारी रहेगा। मां की स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन कर श्रद्धालु अन्न-धन का खजाना प्राप्त करेंगे। महंत रामेश्वरपुरी महाराज खजाना वितरित करेंगे।
बुजुर्गों और दिव्यांगों को मां स्वर्णमयी अन्नपूर्णा का सहज दर्शन कराया जाएगा। शाम पांच से सात बजे तक विशिष्ट जनों के लिए अलग रास्ता दिया जाएगा। महंत रामेश्वरपुरी महाराज ने बताया कि काशी में एक बार दुर्भिक्ष पड़ने पर स्थिति विकट हो गई थी।
तब ब्राह्मण पुरोहित धनंजय को लंबी यात्रा के दौरान मां अन्नपूर्णा ने दर्शन दिया था। धनंजय की प्रार्थना पर ही मां काशी में जगत के पालन के लिए अवतरित हुई थीं। धनतेसर पर स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन की प्राचीन परंपरा है।