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शोध: पूर्वोत्तर राज्यों की तुलना में यूपी वालों के शरीर में कोरोना रोधी जीन कम

Mon, 28 Sep 2020 04:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण को लेकर चल रहे प्रयासों के बीच रविवार को बीएचयू के प्राणी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के नेतृत्व में किए गए शोध का परिणाम सामने आया है। जिसमें देश भर के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लागों के शरीर में कोरोना रोधी तत्वों का आकलन करने पर पता चला कि पूर्वोत्तर राज्यों में रहने वाले लोगों की तुलना में उत्तर प्रदेश के लोगों के शरीर में कोरोना रोधी जीन कम है।

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प्रोफेसर चौबे के अनुसार, फिलहाल पहले चरण में यूरोप और अमेरिका में रहने वाले लोगों के मुकाबले भारत के लोगों के शरीर में कोरोना रोधी तत्व 18 गुना अधिक है। अब दूसरे चरण में देश के अलग-अलग राज्यों में 50 साल तक के 5641 लोगों का सैंपल लेकर शोध किया गया।


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उसके अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों में नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश के लोगों का डीएनए 80 से 100 प्रतिशत है। इस वजह से उनके शरीर में कोरोना का असर कम रहने का परिणाम सामने आया हैं। जबकि वाराणसी, गोरखपुर, महराजगंज, बस्ती, लखनऊ सहित यूपी के अन्य जिलों के लोगों के शरीर में केवल 46 से 55 प्रतिशत ही कोरोना रोधी जीन है जबकि महाराष्ट्र में यह केवल 33 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि जहां-जहां जीन की फ्रीक्वेंसी अधिक थी, वहां इंफेक्शन और मृत्यु दर समान्य से कम है।

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प्रोफेसर चौबे। - फोटो : अमर उजाला
प्रो. ज्ञानेश्वर का शोध स्विट्जरलैंड के जनरल में हुआ प्रकाशित
प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि हमारा ये शोध स्विट्जरलैंड स्थित साइंस जनरल फ्रंटियर इन जेनेटिक्स में ऑनलाइन अंक में प्रकाशित भी हुआ है। शोध में शोध छात्र अंशिका, रूद्र, नर्गिस, प्रज्वल, निखिल, कलाम, आईएमएस बीएचयू के डॉक्टर पवन कुमार दुबे, डॉक्टर अभिषेक पाठक, बीरबल साहनी, वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय और यूनिवर्सिटी ऑफ ढाका बांग्लादेश की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गाजी सुल्ताना भी शामिल थीं।
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