जगन्नाथपुरी में पखवारे भर बाद सोमवार को घंडे-घड़ियाल बजने शुरू हुए। भगवान जगन्नाथ को परवल के काढ़े का भोग लगा और वह स्वस्थ हो गए। इसी के साथ सविधि पूजा हुई और आरती उतारी जाने लगी। इसी के साथ भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़े। मंगलवार की शाम पांच बजे मंदिर से डोली पर सवार होकर भगवान सपरिवार रथयात्रा पहुंचेंगे। रात को ही उनको रथारूढ़ कराया जाएगा और छह जुलाई से भगवान को रिझाने का तीन दिवसीय रथयात्रा मेला शुरू हो जाएगा।
भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक भक्तों की आवाजाही बनी रही। रथयात्रा मेले के रंग मंदिर से लेकर रथयात्रा चौराहे के आसपास नजर आने लगे हैं। मंगलवार को मंगला आरती के बाद भगवान के कपाट खुलेंगे। इसके बाद भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगेगी। शाम चार बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को पालकी पर विराजमान कराकर रथयात्रा ले जाया जाएगा। अस्सी से दुर्गाकुंड, गुरुधाम, खोजवां होते हुए कमच्छा से होकर रथयात्रा में भगवान की डोली बेनीराम के बगीचे में पहुंचेगी। इससे पहले रथ शहीद उद्यान से खींचकर रथयात्रा पर ले आया जाएगा। रात को भगवान का श्वेत शृंगार होगा और फिर प्रतिमाओं को रथारूढ़ करा दिया जाएगा। भोर में कपाट खुलेंगे और फिर रथयात्रा का मेला गुलजार हो जाएगा।