बीते साल अनुमति के ठीक एक दिन बाद रेल अधिकारियों ने बनारस लिखा हुआ बोर्ड लगवाया और शिवगंगा सहित अन्य ट्रेनों की पट्टी पर मंडुवाडीह हटाकर बनारस कर दिया था। इसके बाद मुख्यालय से आए दिशा निर्देशों के बाद आनन-फानन में वाराणसी मंडल के अधिकारियों ने बनारस लिखा हुआ बोर्ड और पट्टी हटवाकर मंडुवाडीह कर दिया। तब से अब जाकर स्टेशन का नाम बदलकर बनारस स्टेशन हुआ।
बनारस स्टेशन पर यात्रियों के लिए अनुकूल सुविधाएं मौजूद हैं। स्टेशन परिसर में विशाल प्रतीक्षालय क्षेत्र, विभिन्न श्रेणियों के प्रतीक्षालय, उच्च श्रेणी यात्री विश्रामालय, एस्केलेटर, लिफ्ट, फूड प्लाजा, कैफेटेरिया, वीआईपी लाउंज, पार्किंग, सेल्फी प्वाइंट, राष्ट्रीय ध्वज, धरोहर के रूप में छोटी लाइन का इंजन, आधुनिक बुकिंग व आरक्षण कार्यालय, सभी सुविधाओं से परिपूर्ण वेटिंग रूम है।
स्टेशन में एसी लाउंज, गैर-एसी रिटायरिंग रूम और डॉर्मिटरी भी हैं। स्टेशन परिसर की वास्तुकला काशी की आस्था को दर्शाती है। स्टेशन के परिवेश में फव्वारे और बैठने की जगह शामिल है। इस स्टेशन को उन्नत यात्री सुविधाओं के रख-रखाव के लिए आईएसओ सर्टिफिकेशन, साफ-सफाई व कुशल प्रबंधन के लिए पांच एस सर्टिफिकेशन भी प्राप्त है।