भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह वाराणसी दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए बूथ जीतने की रणनीति पर जोर दिया। कहा, इस बार काशी में जीत के साथ पिछले चुनाव से दोगुना ज्यादा महत्वपूर्ण है। पूरे देश में भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही है, ऐसे में उनकी अपनी सीट पर ऐतिहासिक जीत होनी चाहिए।
इसके लिए पार्टी पदाधिकारी क्षेत्र, जिला और महानगर में सीमित रहने के बजाय बूथ स्तर पर काम करें। इस दौरान शाह ने तीन अलग-अलग बैठकें कीं। वाराणसी सहित पूर्वांचल की 27 सीटों की पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे और फीडबैक के आधार पर समीक्षा की। पूर्वांचल की पांच लोकसभा सीटों पर पार्टी की चिंता को साझा करते हुए कहा, इन सीटों पर ज्यादा मेहनत करनी होगी।
इसके लिए वहां मतदान का प्रतिशत बढ़ाकर विपक्ष को हराया जा सकता है। उन्होंने पूर्वांचल में क्लीन स्वीप का मतलब यूपी विजय बताया।
प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने मुद्दों पर आधारित चुनाव प्रचार अभियान चलाने पर जोर दिया। कहा, विपक्ष के पास मुद्दे नहीं है, वे कुछ बातों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं मगर उनकी बात में दम नहीं है।
भाजपा के पास पिछले पांच साल के काम के साथ ही पीएम मोदी का दमदार नेतृत्व है। ऐसे में पूर्वांचल में केंद्र और प्रदेश सरकार की घर-घर तक पहुंची योजनाओं का प्रचार किया जाए। इसके बाद विदेशों में पीएम की बढ़ी लोकप्रियता को भी जनता तक पहुंचाएं। इसके लिए जरूरी है कि गली-मुहल्लों और गांवों में जगह-जगह इसकी चर्चा हो।
वाराणसी लोकसभा चुनाव संचालन समिति की बैठक में उन्होंने लोकसभा क्षेत्र को चार भागों में बांटकर पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। कहा, 17 मंडल, 226 सेक्टर और 1819 बूथों पर पदाधिकारियों की मौजूदगी हो और वे मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करें।
इसी लिहाज से पिछले चुनाव में 58 फीसदी मतदान को इस बार 70 फीसदी पहुंचाने का लक्ष्य दिया। इसके लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाकर पीएम मोदी के काशी के लगाव, 5 साल के विकास, विश्वनाथ मंदिर के विश्वनाथ धाम के सफर और नामांकन के दौरान स्वागत को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की बात कही।
इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और यूपी प्रभारी जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल, प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा, काशी क्षेत्र के अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव के अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के समन्वयक भी मौजूद रहे।