भरत सिंह का जनता के नाम पत्र
- फोटो : अमर उजाला
भरत सिंह ने पत्र में कहा है कि बचपन से लेकर अब तक बलिया में जीता आया हूं। संघ के स्वयंसेवक जीवन से सामाजिक जीवन की शुरुआत की। बीएचयू की छात्र राजनीति से संघर्ष की शुरुआत की है। आपातकाल के दौरान मार्च 1975 में बीएचयू छात्रसंघ का महामंत्री बना। मीसा में 19 महीनों तक जेल में रहा। इसके बाद बीएचयू छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना गया। कहा, मेरी छवि हमेशा जनता के बीच रहने वाले नेता की है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता के हितों के लिए संघर्ष ही मेरा जीवन है।
भरत सिंह का जनता के नाम पत्र
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भरत सिंह ने कहा, पार्टी नेतृत्व द्वारा दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से आहत हूं। बलिया में मेडिकल कॉलेज, पूर्वांचल एक्सप्रेस, किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और अन्य मुद्दों को लगातार संसद में उठाता रहा हूं। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलिया से उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी। इसके बावजूद ऐसे प्रत्याशी को थोप दिया गया, जिसका बलिया से कोई जुड़ाव नहीं है और जो 2007 के लोकसभा के उपचुनाव में जमानत तक नहीं बचा पाए थे। सवाल किया कि उन्हें पार्टी ने किस आधार पर उम्मीदवार बना दिया।
भरत सिंह के पत्र के जवाब में वीरेंद्र सिंह 'मस्त' ने कहा कि यह लोकतंत्र है। इसमें कोई कुछ भी कहने को स्वतंत्र है। अगर वह आरोप लगा रहे हैं तो सांसद थे कार्रवाई भी करा देते। जिले में भूमाफियाओं पर कार्रवाई कराना उनका कर्तव्य था।
वीरेंद्र सिंह 'मस्त' ने कहा कि उन्हें पार्टी नेतृत्व की ओर से मंगलवार देर शाम जानकारी दी गई। इस संबंध में बुुधवार को उन्हें दिल्ली भी बुलाया गया। कहा कि अब वह बलिया से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। जल्द ही जिले में पहुंचकर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रणनीति तय करेंगे।