कांग्रेस प्रत्याशी के नाम के एलान के साथ ही वाराणसी संसदीय सीट पर सियासी तस्वीर थोड़ी साफ हुई है। इस सीट पर भाजपा का सीधा मुकाबला विपक्षी गठबंधन से है। भाजपा से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैदान में हैं जबकि इंडी गठबंधन से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय तीसरी बाद मोदी से मुकाबला करेंगे।
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विपक्षी गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते में आई है। इस सीट पर अजय राय इकलौते ऐसे प्रत्याशी हैं जो तीसरी बार प्रधानमंत्री को चुनौती पेश करेंगे। मालूम हो कि 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी को 6,74,664 वोट मिले थे। उन्हें पिछले चुनाव से 7.26 फीसदी ज्यादा यानी 63.62 फीसदी मत प्राप्त हुए थे।
समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी शालिनी यादव दूसरे स्थान पर थीं। उन्हें 1,95,159 मत प्राप्त हुए थे। सपा को 2014 के मुकाबले 14.01 फीसदी ज्यादा यानी 18.40 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस के अजय राय तीसरे स्थान पर थे। उन्हें 1,52,548 मत मिले थे। उन्हें भी 2014 के चुनाव से 7.04 फीसदी ज्यादा यानी 14.38 फीसदी मत हासिल हुए थे।
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2019 के चुनाव में वाराणसी में 10,60,829 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। मोदी ने यह चुनाव 4,79,505 मतों के बड़े अंतर से जीता था। 2014 में मोदी को मिले थे 56.37 फीसदी मत : 2014 में पूरे देश में बदलाव की लहर थी। भाजपा के पक्ष में माहौल बना और मोदी ने वाराणसी को अपनी सियासी कर्मभूमि बनाई।
इस चुनाव में उन्हें चुनौती देने दिल्ली से आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल वाराणसी आए। मोदी ने इस चुनाव में 5,81,022 मत हासिल कर 3,71,784 मतों के अंतर से एकतरफा जीत दर्ज की। वाराणसी संसदीय सीट पर यह रिकॉर्ड मतदान था। अरविंद केजरीवाल 2,09,238 मत प्राप्त कर दूसरे पायदान पर रहे।
कांग्रेस के टिकट पर अजय राय मैदान में थे। उन्हें 75,614 मत हासिल हुए थे। जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ने वाले नरेंद्र मोदी को वाराणसी की जनता ने हाथों हाथ लिया। उनकी झोली में 56.37 फीसदी मत आए। जबकि आप प्रत्याशी को 20.30 और कांग्रेस को 7.34 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव में 10,30,812 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
बहरहाल, 2019 के आंकड़ों पर गौर करें तो यह जंग 64 बनाम 33 के बीच है। 2019 में भाजपा को लगभग 64 फीसदी वोट मिला था। सपा-कांग्रेस को मिले वोटों को जोड़ दें तो यह 33 फीसदी के करीब है।
2019 के परिणाम
भाजपा-63.62 प्रतिशत
समाजवादी पार्टी-18.40 प्रतिशत
कांग्रेस- 14.38 प्रतिशत
राॅबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर सबसे बड़ी और छोटी जीत
राॅबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर सबसे कम अंतर से जीत का रिकॉर्ड बसपा के भाईलाल कोल के नाम है। वर्ष 2007 के उपचुनाव में सांसद बने भाईलाल ने सपा के प्रत्याशी रहे पकौड़ी लाल कोल को महज 339 वोटों के अंतर से हराया था। भाईलाल को 219601 वोट मिले थे, जबकि पकौड़ी लाल कोल को 219262 मत मिले।