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Lok Sabha Election: एसपी बघेल बोले, काशी का मतदाता बुद्धिजीवी, वह बिफोर मोदी, आफ्टर मोदी का फर्क समझता है

Thu, 30 May 2024 06:37 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Lok Sabha Election: सपा परिवार के खिलाफ बार-बार चुनाव लड़ने पर यह भी कहते हैं कि इसमें कोई दो राय नहीं कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह मेरे राजनीतिक गुरु हैं। उन्होंने ही दौड़ने के लिए ट्रैक दिया। पेश है अमर उजाला संवाददाता राहुल दुबे की केंद्रीय मंत्री एसपी बघेल से बातचीत।
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एसपी बघेल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुलिस की नौकरी से केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय करने वाले एसपी बघेल कहते हैं कि काशी का मतदाता बुद्धिजीवी है, वह बिफोर मोदी, आफ्टर मोदी का फर्क समझता है। वह जानता है कि काशी में 72 हजार करोड़ रुपये लगे हैं तो विकास भी दिखाई दे रहा है और उसका फायदा शहर और शहर के लोगों को हुआ है।

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काशी में प्रचार करने आए हैं, कैसा अनुभव रहा आपका?
बहुत अच्छा अनुभव है। यहां का मतदाता बुद्धिजीवी बहुत है। वे अच्छा-बुरा सबकुछ समझते हैं। वो संकल्प पत्र भी समझते हैं, जीडीपी क्या है समझते हैं, विकास कार्यों को समझते हैं। 72 हजार करोड़ यहां पर लगा है, वह दिख रहा है वह उसको बताते हैं। बिफोर मोदी और आफ्टर मोदी का फर्क समझते हैं। 

मैं यहां मतदाताओं से मिलता हूं तो वह कहते हैं कि आपके यहां सांसद का चुनाव होता है, हम तो प्रधानमंत्री चुन रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि मोदीजी गोद के बच्चे हैं और राहुल गांधी पेट के बच्चे हैं तो हम गोद के स्वस्थ बच्चे को क्यों छोड़ दें। योजनाओं का लाभ भरपूर मिल रहा है। यहां लड़ाई जीत की है ही नहीं यहां तो टिकट पक्की थी, जीत पक्की थी, लड़ाई तो बड़े अंतर से जीतने की है।
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आप कह रहे हैं कि टिकट पक्की थी, जीत पक्की थी, फिर इतने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्यमंत्री प्रचार में क्यों लगा दिए?
ये इसलिए है कि जब हमारे घर के मुखिया चुनाव लड़ रहे हैं तो हम सभी लोग कुछ योगदान दे सकते हैं तो देना चाहिए। दूसरी बात हम लोग यहां रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में हैं कि 2014 और 2019 से बड़ी जीत हमारे नेता की दर्ज हो।

वाराणसी लोकसभा मंडल में पूर्वांचल की 12 लोकसभा सीटें हैं। आपको क्या लगता है मोदीजी के यहां चुनाव लड़ने से कितना असर पड़ेगा बाकी सीटों पर?
मोदीजी वाराणसी से लड़ते हैं तो उसका फर्क आसपास की सीटों पर साफ दिखाई देता है। जैसे योगीजी गोरखपुर से लड़ते हैं, तो उसका फर्क पड़ता है। 

अब एक दूसरी चीज देखिए कि अपना किला, पारंपरिक सीट अमेठी से राहुल गांधी जब लड़े और वह किला गिरा तो पास की दीवार यानि की रायबरेली की सीट में दरारें आ गईं तो सोनिया गांधी चुनाव की जगह राज्यसभा चलीं गईं। तो कहा गया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं तो राज्यसभा कोई बीमारों का सदन नहीं है। 

यहीं दूसरी बात कहूंगा कि मेरी तरह अगर सोनिया गांधी होती जो रोज क्षेत्र में जातीं तो स्वास्थ्य वाली बात कहतीं, उनका साल का औसत देखे तो एक साल में दो बार रायबरेली जातीं थीं। मैं क्षेत्र में कोई शादी, ब्याह सुख दुख में मतदाता को अकेले नहीं छोड़ता। लोग यहां तक कहते हैं कि मैं भैंस के मरने पर भी जाता हूं।

आप चुनाव बहुत लड़ते हैं, केंद्रीय मंत्री थे, उसके बाद मैनपुरी की करहल सीट लड़े। सपा परिवार के खिलाफ भी लड़े जबकि कहा जाता है कि आपके पहले राजनीतिक गुरु मुलायम सिंह यादव रहे?
अर्जुन कन्फ्यूज हो गए थे कुरुक्षेत्र में तो गीता के ज्ञान ने उनके मोह को हटाया। इसमें कोई दोराय नहीं है, मैं स्वीकार करता हूं कि मुलायमजी मेरे राजनीतिक गुरु थे। उन्होंने चुनाव लड़ाया, प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो मैंने पटरी पर दौड़ना शुरू किया। पटरी पर जब तक गाड़ी नहीं आती है तो इंजन चाहे जितना ही मजबूत क्यों न हो पहिए रुक जाते हैं। उन्होंने लगातार तीन बार टिकट दिया मैंने जीत की हैट्रिक लगाई। चौथी बार किसी ने उनके कान भर दिए तो टिकट काट दिया। 

यह कोई आत्मप्रशंसा की बात नहीं है भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और पिछले दस साल में मुझे पांच बार टिकट दिया है। मुझे इस योग्य समझा, लड़ाया, जीतना-हारना अलग बात है। सपा का क्या है, मुलायम सिंह जी दो जगह लड़े एक जगह इस्तीफा दिया तो अखिलेश आए फिर अखिलेश दो जगह लड़े तो एक जगह इस्तीफा दिया तो धर्मेंद्र यादव आए इसी तरह तेज प्रताप सिंह आए। ऐसे ही डिंपल यादव आईं।

आप आगरा से सांसद हैं, पिछले पांच साल में वहां क्या वादे पूरे किए और अगर इस बार फिर जीत गए तो अगले पांच साल में क्या करेंगे आगरा के लिए?
मैंने आगरा के लिए जो वादे किए सब पूरे किए। अभी सिविल एन्क्लेव शुरु किया जाएगा। ऐसा कोई देश नहीं होगा जहां से हमारे आगरा के लिए फ्लाइट न हो। स्मार्ट सिटी हो गया, मेट्राे पर काम करना है। पीएम और सीएम ने आगरा पर काफी ध्यान दिया है। 
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आगरा में पानी की समस्या है इस पर बहुत काम हुआ है, हर घर जल पहुंच रहा है। मैं अभी आगरा के जलस्तर बढ़ाने पर काम कर रहा हूं। दूसरी बात यह कहूंगा कि दो-दो लाख रुपये की तनख्वाह लेने वाले इंजीनियर, अफसर, इन्हें समझ आना चाहिए कि जलस्तर कहां जा रहा है। 

इनको समझ में आना चाहिए कि हर साल जलस्तर कितना नीचे जा रहा है। डार्क ब्लाॅक होते जा रहे हैं, जब मैं पहली बार सांसद बना था तो 45 डार्क ब्लॉक थे और आज 400 हो गए हैं। आने वाले समय में गिरता हुआ भूजल स्तर बहुत बड़ी समस्या होगी।

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