प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नामांकन में प्रस्तावकों के रूप में भाजपा के तीन पुराने कार्यकर्ताओं को तरजीह दी। साथ ही अयोध्या में राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा का मुहूर्त निकालने वाले पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ को पास बैठाकर नामांकन किया। चार प्रस्तावकों में एक ब्राहमण, दो ओबीसी और एक एससी समुदाय से आते हैं।
प्रस्तावकों की सूची में पुराने कार्यकर्ताओं को शामिल करके पीएम मोदी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। संदेश दिया है कि पार्टी कार्यकर्ताओं को ही तरजीह देती है। गणेश्वर शास्त्री के जरिये आध्यात्मिक एजेंडे को साफ किया है। जातीय समीकरण भी साधा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट से जुड़े रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा में करीब दो लाख पटेल मतदाता हैं।
इसी को ध्यान में रखकर ही पीएम की टीम ने सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के वैजनाथ पटेल को प्रस्तावक बनाया है। सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में करीब 90 हजार पटेल मतदाता हैं। इसी तरह रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में 1.10 लाख पटेल मतदाता हैं।
प्रस्तावकों ने दिया पीएम को धन्यवाद
जिन्होंने भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा कराई, उनकी प्रतिष्ठा होनी तय है। देश ही नहीं, संपूर्ण विश्व का मंगल होगा। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और नई ऊंचाई प्राप्त करेगा। प्रधानमंत्री ने मुझे प्रस्तावक बनाया, इसके लिए उनका धन्यवाद। - पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़, रामघाट
मैं 14 वर्ष की उम्र में ही छात्रसंघ की राजनीति आया। एक कार्यकर्ता के तौर पर इतना बड़ा सम्मान मिला है। पीएम के दिखाए मार्ग पर चला, जिसका फल प्रस्तावक बनने के रूप में मिला। पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया, इसके लिए धन्यवाद देता हूं। - संजय सोनकर, शिवपुर, जिला महामंत्री भाजपा
रोड शो से नामांकन तक हर फैसले के कुछ न कुछ मायने
प्रधानमंत्री ने रोड शो से नामांकन तक कुछ भी अनायास नहीं किया। हर फैसले के कुछ मायने ही रहे हैं। चार प्रस्तावकों के जरिये पूर्वांचल का जातीय और सामाजिक समीकरण साधा है। गणेश्वर शास्त्री को पास बिठाकर ब्राह्मण समाज को संदेश दिया। भदोही और बलिया लोकसभा सीट पर ब्राह्मण निर्णायक भूमिका में रहते हैं। बैजनाथ पटेल और लालचंद कुशवाहा ओबीसी हैं।
वाराणसी में गैर यादव ओबीसी मतदाताओं को मिला लिया जाए तो यह संख्या पांच लाख से ज्यादा होगी। संजय सोनकर दलित हैं। वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में सवा लाख दलित मतदाता हैं। चंदौली ओबीसी बोट निर्णायक भूमिका में रहता है। गाजीपुर और आजमगढ़ में भी पिछड़ा वर्ग निर्णायक रहता है। मिर्जापुर लोकसभा सीट भी ओबीसी बहुल है।