दरअसल, 2009 के लोकसभा चुनाव में मुरली मनोहर जोशी भाजपा प्रत्याशी थे। उस दौरान मुख्तार अंसारी बसपा के प्रत्याशी थे। वह चुनाव हिंदू बनाम मुस्लिम हो गया था। उस दौरान भाजपा प्रत्याशी करीब 17 हजार वोटों से जीते थे।
2014 में मुस्लिम मतों के बिखराव को रोकने के लिए मुख्तार अंसारी चुनाव नहीं लड़े थे। इस बार अतीक के चुनाव लड़ने से मुस्लिम मतों का बिखराव होना तय है। जो मुस्लिम वोट गठबंधन और कांग्रेस को जाता, वह अब अतीक की ओर शिफ्ट हो सकता है।