मालिक ने खाने की व्यवस्था नहीं की तो मजदूरों ने तय किया कि पैदल ही चलकर घर पहुंचा जाएगा। तेरह दिन चलने के बाद सभी फरिहां बाजार पहुंचे। क्षेत्र के समाजसेवी मोहम्मद ताहिर ने खाने-पीने की व्यवस्था की। सोनभद्र से आ रहे बालू लदे एक ट्रक से इन लोगों को गोरखपुर भेजा गया। मजदूरों में छोटेलाल चौहान, काशी चौहान, बेचैन, रामस्वरूप, रामपाल, मिंटू, सुनील, सूरज विश्वकर्मा आदि थे।