फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मजदूरों का दर्द: सपने दिखाकर ले गया ठेकेदार भी मोबाइल बंद कर हुआ फरार

Sat, 30 May 2020 03:35 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

घर परिवार चलाने के लिए घर से हजारों किमी दूर पहुंचे जब अपनी जान पर बन आई तो अपने घर और गांव की याद आई। सब सामान समेटा और रास्ते में हजारों मुसीबतों को झेलते हुए घर पहुंच गए। कोरोना महामारी ने पारिवारिक रिश्तों से लेकर सामाजिक रिश्तों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

विज्ञापन

आजमगढ़ जिले के बूढ़नपुर तहसील के भीलमपुर छपरा गांव के प्रवासी श्रमिक रास्ते की लाख मुसीबतों को झेलते हुए घर पहुंचे हैं। अपना हाल बयां करते हुए श्रमिकों की आंखों में आंसू भर आते हैं। श्रमिकों का कहना है कि बड़े-बड़े सपने दिखाकर एक ठेकेदार हमें मुंबई ले गया था।


अपने सपनों को पूरा करने के लिए हम भी उसके साथ रवाना हो गए। सब कुछ ठीक-ठाक ही चल रहा था लेकिन लॉकडाउन ने जब काम-धंधों को बंद किया तो ठेकेदार भी मोबाइल नंबर बंद कर फरार हो गया। ऐसे में खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई। जब भूखे रहने की नौबत आई तो कमरे में रखे सामानों को बेच कर पेट भरने लगे। जब वह भी खत्म हो गया तो दूसरों से पैसा उधार लेकर घर आ गए।

विज्ञापन
Trending Videos

सूरज ने बताया कि सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन कोरोना के चलते देश में लॉकडाउन हो गया और काम बंद हो गया। हम लोगों के पास जो भी पैसा था वो भी खत्म हो गया। हम सब दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए। शहर में हम मजदूरों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं था। मकान मालिक ने किराए का दबाव बनाया और साथ ही राशन की दुकान उधार नहीं मिल रहा था।

महेश ने कहा कि ठेकेदार द्वारा बड़े-बड़े वादे किए गए थे। हम भी अच्छे भविष्य का सपना संजोए मुंबई पहुंच गए, लेकिन जब हम सब का बुरा समय आया तो हमें अच्छे भविष्य के सपने दिखाने वाला ठेकेदार भी फोन बंद करके भाग गया। अपने पास जो भी समान था, उसे बेच कर किसी तरह गुजारा किया पैसा खत्म होने घर उधार मांग कर किसी तरह घर पहुंचे।
विज्ञापन

मनोज कुमार ने बताया कि घर से दूर हूं, मैं बहुत मजबूर हूं, हां आप सही समझें, मैं एक मजदूर हूं। काम की तलाश में कहीं दूर निकल आया था, वापिस जाना इतना मुश्किल होगा, यह कभी सोच नहीं पाया था। लेकिन जिन कष्टों को उठाते हुए मैं अपने घर पहुंचा हूं यह मेरी ही आत्मा ही जानती हैं। जब उन कष्टों को याद करता हूं तो रोम रोम सिहर जाता है। अब तो जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें