पर्यावरणविद् डॉ. गणेश पाठक ने बताया कि शराब बिक्री की खुली छूट से जहां कोरोना के खिलाफ छिड़ी जंग में देश पिछड़ जाएगा। साथ शराब सामाजिक विषमता को उत्पन्न करेगी। इस लिए लॉकडाउन प्रथम व द्वितीय चरण में सरकार द्वारा लागू व्यवस्था ठीक थी। सरकार को शराब बिक्री के अपने निर्णय पर पुर्नविचार करना चाहिए।
चिकित्सक डॉ बद्रीराज यादव ने कहा कि शराब की बिक्री से कोरोना के संक्रमण का खतरा निश्चित तौर पर बढ़ेगा। दूसरी बात यह कि मध्यम एवं गरीब वर्ग के सामने खाने के भी लाले पड़ेंगें और परिवार में कलह होगी, जो लॉकडाउन के अनुपालन में बाधक बनेगी। प्रदेश सरकार को वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए शराब की बिक्री पर पाबंदी लगानी चाहिए।
सपा के जिला मीडिया प्रभारी सुशील पांडेय कान्हजी ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन में ही शराब की बिक्री की अनुमति देना हास्यास्पद एवं आश्चर्यचकित करने वाला है। इस विकट परिस्थिति में जब देश कोविड-19 जैसी महामारी से लड़ रहा है। देश के नागरिक सरकार के हर निर्देशों का पालन ईमानदारी से कर रहे है। ऐसे में शराब की बिक्री कोरोना के खिलाफ जंग को कमजोर करने सरीखा है।
शिक्षक सीमा कहती हैं कि पिछले दो दिनों से शराब की बिक्री शुरू होने से जो तस्वीरें उभर कर समाने आई हैं, उसने विचलित किया है और यह अहसास करा रही हैं कि जिस लड़ाई में हम पूरी दुनिया में आगे हैं अब कहीं पिछड़ न जाए। जब कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक शराब की बिक्री प्रतिबंधित करनी चाहिए।