वाराणसी कचहरी परिसर में वादी पक्ष
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अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्बन डेटिंग के आवेदन पर आदेश और अन्य मुद्दों पर सुनवाई के लिए सात अक्तूबर की तिथि नियत कर दी। सुनवाई के दौरान वादिनी गण, पैरोकार सोहन लाल आर्य, अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी, सुधीर त्रिपाठी, दीपक सिंह व अन्य पक्षकार भी कोर्ट में मौजूद रहे।
मुस्लिम पक्ष दोबारा शिवलिंग लगने नहीं देगा
वादिनी राखी सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह व अनुपम द्विवेदी ने कार्बन डेटिंग के मुद्दे पर विरोध किया और कहा, कार्बन डेटिंग की जांच से अपने ही अस्तित्व पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। इस जांच से शिवलिंग खंडित होने का अंदेशा है। फिर उसे हटाना पड़ेगा और मुस्लिम पक्ष दुबारा लगने नहीं देगा। हिंदू धर्म में खंडित मूर्ति की पूजा वर्जित है। जांच का आवेदन मुस्लिम पक्ष को देना चाहिए। हमारी तरफ से आवेदन देने पर अपने ही अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो रहा है और इसका हम विरोध कर रहे हैं।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता मुमताज अहमद, एखलाक अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दकी ने कहा कि शिवलिंग पत्थर का होता है। जबकि पत्थर और लकड़ी की कार्बन डेटिंग हो ही नहीं सकती। कार्बन डेटिंग जीवित चीज की होती है। यह भी कहा कि पत्थर कार्बन डाई ऑक्साइड आब्जर्ब नहीं कर सकता।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि सर्वे के मुद्दे पर दी गई आपत्ति का अभी तक निपटारा नहीं हुआ है। ऐसे में कार्बन डेटिंग का आवेदन अभी परिपक्व यानि प्री मेच्योर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बरामद कथित शिवलिंग/फव्वारे को सुरक्षित व संरक्षित रखने का आदेश दिया है। ऐसे में उस पर जांच के लिए केमिकल डालने पर उसका क्षरण होगा। ऐसे में कार्बन डेटिंग का आवेदन खारिज होने योग्य है।