सत्यापन के दौरान इनमें से 55 लोग ऐसे मिले, जिनके पास से मिले दस्तावेजों को लेकर शंका हुई। स्थानीय अभिसूचना इकाई की ओर से पश्चिम बंगाल के वीरभूमि, मुर्शिदाबाद, पश्चिम मेदिनीपुर, मालदा और हुगली जिले की पुलिस को इन लोगों के पास से मिले दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट में यदि इनके पश्चिम बंगाल के निवासी होने की बात की पुष्टि नहीं हुई तो इन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आठ मोहल्लों में रहते हैं संदिग्ध
डीजीपी ओम प्रकाश सिंह के निर्देश पर हाल ही में पुलिस ने जिले भर में झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों का सत्यापन किया था। तब कज्जाकपुरा, अलईपुरा, भदऊं चुंगी, राजघाट, बेनिया, बजरडीहा, नगवा, लल्लापुरा और रेलवे स्टेशनों के आसपास रहने वाले तीन हजार से ज्यादा लोग अपने बारे में ठोस जानकारी नहीं दे सके थे।
उनके पास से मिले दस्तावेज भी संदिग्ध प्रतीत हुए। इन लोगों का कहना था कि वह बांग्लादेशी नहीं है, बल्कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की घुमंतू जनजातियों से उनका ताल्लुक है। फिलहाल पुलिस ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है और इनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। जल्द ही खुफिया इकाइयां इनका दोबारा सत्यापन करेंगी।
पाकिस्तान से बनारस आए और लापता हो गए
बीते वर्षों में कुछ लोग पाकिस्तान से घूमने के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों से होते हुए बनारस आए और फिर लापता हो गए। यह कौन लोग थे और कहां गए, इसका ब्योरा किसी के पास नहीं है। इस संबंध में स्थानीय अभिसूचना इकाई के अधिकारियों ने बताया कि जिले में पाकिस्तान से आए सात लोग दीर्घावधिक वीजा (लांग टर्म वीजा) के आधार पर रह रहे हैं। इन सभी का रिकार्ड मौजूद है। पाकिस्तान से बनारस आए अन्य किसी के संबंध में जानकारी नहीं है।