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Lit Fest 2024: मंदिर-मस्जिद वाला विवाद दुखी करने वाला, अभिनेत्री नवल बोलीं- अजान भी सुनती थी और घर में हवन...

Tue, 13 Feb 2024 01:36 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

बनारस लिट फेस्ट के तीसरे दिन रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में अभिनेत्री दीप्ति नवल ने कहा कि मंदिर-मस्जिद वाला विवाद दुखी करने वाला है। उन्होंने कहा कि मैं मस्जिद की अजान भी सुनती थी और घर के अंदर हवन भी होता था।
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अभिनेत्री दीप्ति नवल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अभिनेत्री दीप्ति नवल ने कहा कि इंसा तक पहुंचेंगे जिस रोज सभी खुदा के करीब होंगे...। मंदिर मस्जिद का विवाद बेहद दुखी करने वाला है। तुम्हारा भगवान ठीक नहीं, मेरा भगवान ठीक है। इसका कोई मतलब नहीं। जब हम बड़े हो रहे थे, उस दौरान यह चीज नहीं थी। मैं क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ती थी। मस्जिद की अजान भी सुनती थी। घर के अंदर हवन होता था। 
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आर्य समाजी माहौल था पंडित फैमिली का। सभी अपने-अपने धर्म को मानते थे। कोई तकलीफ नहीं थी किसी को किसी से। मैं चाहती हूं कि वही पुराना माहौल वापस आ जाए मेरे हिंदुस्तान में। सोमवार को बनारस लिट फेस्ट के तीसरे दिन रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम के दौरान दीप्ति नवल ने अपने फिल्मी सफर की यादें साझा कीं। 

उन्होंने जीवन के कई पहलुओं पर भी बेबाकी से बातें रखीं। दीप्ति ने कहा कि चश्मे बद्दूर के किरदार भी समाज का प्रतिनिधित्व करते थे। जीनत अमान आइकॉन थीं लेकिन ऐसी लड़कियां बाहर नजर नहीं आती थीं। बाहर नजर आती थीं शबाना आजमी जैसी साधारण लड़कियां। 
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उस दौर में स्टीरियो टाइप की इमेज को तोड़ना आसान नहीं था। मुझे सिंपलिसिटी में ही ग्लैमर नजर आता था। दीप्ति नवल ने बताया, मैं कभी एक्टिंग स्कूल नहीं गई। मुझे अभिनय के क्षेत्र में जाना था लेकिन हिम्मत ही नहीं हुई घरवालों को बताने की। मैंने अपनी इच्छा लंबे समय तक छिपाए रखी। 

स्नातक करने के बाद जब मैंने इस बारे में अपना माता-पिता से कहा तो उनकी प्रतिक्रिया भी चौंकाने वाली थी। आज फिल्मों के सेट का माहौल बदल गया है। पहले सेट पर क्रू मेंबर में केवल हेयर ड्रेसर महिलाएं होती थीं। अब हर विभाग में लड़कियां हैं और बहुत ही ऊर्जावान हैं।

मेरी किताब ए कंट्री काल्ड चाइल्डहुड मेरे जीवन के पहले 18 साल की कहानी है। हर बच्चे के जेहन में पैरलल दुनिया होती है। आपने देखा होगा बच्चे अपने में मस्त होते हैं उनकी अलग दुनिया होती है। मैं भी कुछ ऐसी ही थी और मेरा बचपन भी इसी तरह से था। न्यूज रील की तरह जिंदगी चलती रहती है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कलाकार के तौर पर उसे कैसे देखते हैं।

मैंने देखा अपनी सोच वाला बनारस
दीप्ति ने कहा कि कल मैं बनारस की गलियों में पैदल चली। मैंने वह बनारस देखा जो मेरी सोच में था। बनारस की मस्ती, मस्त अंदाज मुझे बहुत पसंद आया। मैं उस वातावरण में नहीं रह सकती, जहां मुझे घुटन होती है। इसलिए मैं 25 दिन से ज्यादा मुंबई में नहीं रह सकती।

मुसलमान होने के नाते बनवास लिखना मेरे लिए जोखिम भरा काम थामा
शायर शकील आजमी ने कहा कि एक मुसलमान होने के नाते बनवास लिखना मेरे लिए जोखिम भरा काम था। जोखिम इस बात का था कि कहीं बनवास लिखते समय कोई गलती ना हो जाए और समाज में गलत संदेश जाए। इसमें मेरे कई ब्राह्मण दोस्तों ने मेरी काफी मदद की। 

 

रामायण का हर किरदार अपने आप में बहुत बड़ा है। अगर जामवंत नहीं होते तो हनुमान को अपनी शक्ति का अहसास ही नहीं होता। अपनी किताब बनवास पर चर्चा करते हुए शकील आजमी ने कहा कि रामायण के चरित्र में अहिल्या और उर्मिला का किरदार तो अलग ही है। 

 

अहिल्या अपने पति से ही शापित हो जाती है और राम के स्पर्श से फिर से उसे नया जीवन मिलता है। अहिल्या जब इंसानी रूप में आती है तो वह कहती है राम तुम मुझे क्यों छूकर गुजरे, तोड़कर क्यों मुझे पत्थर से निकाला तुमने, मूर्ति ही रहने देते तो शायद मेरी पूजा होती, औरतें देवियां मरकर ही बना करती हैं...।

 

शकील ने कहा कि उर्मिला का त्याग देखिए। नई नई शादी हुई और वनवास का समय आ गया। लक्ष्मण चले गए वनवास में। उसे पता है कि मेरा पति 14 साल तक नहीं आएगा। उर्मिला ने भी मुझे रुलाया है। मेरी सबसे पहली नज्म ही उर्मिला थी। बहुत जिया है मैंने उर्मिला को।

 

इसके बाद उन्होंने उर्मिला पर लिखी नज्म सुनाई। राम को जो मिला वनवास गलत था, लेकिन कोई राजा कभी मजबूर भी हो सकता है, जिद पर अड़ जाए जो रुठी हुई सौतेली मां, बाप बेटे से दूर भी हो सकता है...। आगे सुनाया, पत्नी ही नहीं खुद को भी कुरबान किया छोटे लक्ष्मण ने बड़े राम पर एहसान किया। 

 
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राम राजा भी थे, इंसान भी भगवान भी थे, उर्मिला के मगर भाव से वह अंजान भी थे। शकील आजमी ने कहा कि उनको मांडवी के बारे में बहुत कुछ नहीं पता है लेकिन जल्द ही उन पर भी लिखूंगा। अगर किसी ने रामचरित मानस को अच्छे से पढ़ लिया और दस प्रतिशत भी अपने जीवन में समाहित कर लिया तो उनका जीवन व्यवस्थित हो जाएगा।
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