चंदौली से सपा के पूर्व सांसद और लिकर किंग के नाम से मशहूर जवाहर जायसवाल के खिलाफ पुलिस ने यदि 'एलओसी' (लुक आउट नोटिस) न जारी किया होता तो वह विदेश भाग जाता। घर से भागने के बाद जवाहर नेपाल में छुपा था। पुलिस ने छापेमारी की तो वहां से भागा और फिर बस्ती, लखनऊ, उत्तराखंड व नई दिल्ली में ठहरा।
उसके विदेश भागने की आशंका पर लुक आउट नोटिस जारी हुई तो वह शराब कारोबारी रिश्तेदार के दमोह स्थित घर को सुरक्षित मान कर अकेले रह रहा था और किसी से मुलाकात नहीं करता था। दूसरों के मोबाइल से संकेत में घर पर की गई बातचीत से जवाहर की लोकेशन पता लगी और वह पकड़ा गया।
वहीं, जवाहर का बेटा और 25 हजार के इनामी गौरव की गिरफ्तारी अभी भी पुलिस के लिए चुनौती है। बता दें कि हत्या में वांछित 25 हजार के इनामी चंदौली के पूर्व सांसद हिस्ट्रीशीटर जवाहर जायसवाल को एसटीएफ ने मध्य प्रदेश के दमोह से गिरफ्तार किया है।
23 अप्रैल 2012 को अर्दली बाजार क्षेत्र में बैंक कर्मी महेश जायसवाल की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। महेश की हत्या के मुख्य आरोपी सनी सिंह को एसटीएफ ने 2015 में एनकाउंटर में मार गिराया था। महेश के भाई गुड्डू की याचिका पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जवाहर और गौरव का नाम विवेचना में शामिल किया गया।
बीते साल के दिसंबर महीने में अदालत ने जवाहर और गौरव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया तो दोनों भाग निकले। सर्विलांस की मदद से जवाहर की लोकेशन ट्रैक कर एसटीएफ के इंस्पेक्टर विपिन राय के नेतृत्व में एसआई अरविंद सिंह, अरविंद पाठक, राजेंद्र पांडेय, सनोज यादव, विनोद यादव और राजमणि यादव ने दमोह में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में इंस्पेक्टर कैंट ने बताया कि जल्द ही जवाहर को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की जाएगी।
दिखा ऐंठन में, चल रहा था वाहनों का काफिला
एसटीएफ ने जवाहर को कैंट पुलिस को सुपुर्द किया तब भी वो ऐंठन में ही दिखा और पुलिसकर्मियों को अपने धनबल के किस्से सुनाने के साथ ही करोड़ों के नुकसान की बात कर रहा था। वहीं, जब जवाहर को पुलिस कैंट थाने से लेकर अदालत के लिए निकली तो पीछे आधा दर्जन से अधिक लक्जरी वाहन चल रहे थे।
इस दौरान जवाहर को देखने के लिए वादकारियों और अधिवक्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत के बाहर उमड़ी हुई थी। उधर, जवाहर की गिरफ्तारी की सूचना पाकर महाराजगंज की पुलिस टीम शहर के लिए रवाना हो गई है। महाराजगंज में जवाहर पर गन्ना भुगतान का लगभग 23 करोड़ बकाया है और गिरफ्तारी का वारंट जारी है।
80 के दशक में साइकिल पर शराब बेची, 90 में दी हेलीकाप्टर खरीद की अर्जी
पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल की जिंदगी फिल्मों सरीखी नाटकीय रही है। जवाहर को करीब से जानने वालों के अनुसार 80 के दशक में उसने साइकिल से और फिर बाइक से घूम कर देसी शराब बेची। तकदीर ने कुछ ऐसा साथ दिया कि वह पूर्वांचल के साथ ही प्रदेश का लिकर किंग कहलाने लगा।
देसी शराब की बिक्री से अकूत संपत्ति एकत्र कर जवाहर ने राजनीति में किस्मत आजमाई। उसने 1990 के दशक में कांग्रेस का दामन थामा और जिला पंचायत अध्यक्ष बना। इसी दौरान उसने हेलीकाप्टर खरीदने की अर्जी दी तो प्रदेश के साथ ही देश में उसका नाम सुर्खियों में आया। हालांकि तकनीकी कारणों से जवाहर हेलीकाप्टर खरीदने में सफल नहीं हो सका। इसके बाद 1999 में वो चंदौली से सपा से सांसद निर्वाचित हुआ। 2009 में चंदौली से ही जवाहर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गया।
दर्ज हैं 18 मुकदमे
सोयेपुर जहरीली शराब कांड से चर्चा में आया छोटा लालपुर निवासी जवाहर कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर है। सोयेपुर में जहरीली शराब पीने से 28 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में जवाहर 22 महीने तक जेल में रहा था। कैंट पुलिस के अनुसार जवाहर के खिलाफ हत्या, गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपोें में 18 मुकदमे दर्ज हैं।