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Varanasi: तिहरे हत्याकांड में दो लोगों को उम्रकैद, 18 साल पहले मां और दो बेटों के शव बक्से में बंद मिले थे

Thu, 27 Jul 2023 10:52 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

19 नवंबर 2005 की रात वाराणसी के वरुणा विहार स्थित मकान में मां और उसके दो बेटों की हत्या कर दी गई थी। शवों को स्टोर रूम के एक बक्से में बंद कर दिया गया था। 18 साल बाद कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों को दोषी कर दिया। साथ ही उम्रकैद की सजा सुनाई। 
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वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम अनिल कुमार की अदालत ने वाराणसी के वरुणा विहार कॉलोनी में 18 वर्ष पहले मां और दो बेटों की हत्या के मामले में दो आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने दोनों को उम्रकैद और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया। वारदात के मुख्य आरोपी कालीचरन की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो गई। वहीं, एक अन्य आरोपी के बाल अपचारी होने के कारण उसकी पत्रावली बाल न्यायालय को विचारण के लिए भेज दी गई।

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एडीजीसी कैलाश नाथ के मुताबिक सिकरौल निवासी प्रदीप कुमार ने 25 नवंबर 2015 को कैंट थाने में तहरीर दी थी। प्रदीप ने पुलिस को बताया कि उसके पड़ोस में मुन्नी देवी अपने दो बच्चों पंकज उर्फ गुड्डू और संजय के साथ रहती थी। चार-पांच दिन से मकान से बदबू आने के कारण उसने पुलिस को सूचना दी।
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बक्से के ऊपर भिनभिना रही थीं मक्खियां

मकान का दरवाजा खोलकर देखा गया तो एक बड़े बक्से के ऊपर मक्खियां भिनभिना रही थीं। बक्सा खोला गया तो महिला और उसके दोनों बच्चों का शव कंबल से ढका पाया गया। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद विवेचना शुरू की।

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संपत्ति के विवाद में जघन्य वारदात

जांच में सामने आया कि कॉलोनी में अभियुक्त कालीचरन पाल और उसकी तथाकथित पत्नी मुन्नी के नाम वह मकान था। मुन्नी उस मकान को बेचकर सोनभद्र रहना चाहती थी। कालीचरन अपने पुत्र के कहने पर उस मकान को बेचकर पैसा परिवार में शादी और अन्य मद में खर्च करना चाहता था। ऐसे में कालीचरन ने मुन्नी को रास्ते से हटाने के लिए अपने दो लोगों गुलाब पाल और राजकुमार के साथ सुदामा गिरि को अपनी साजिश में शामिल कर उसे 50 हजार रुपये का लालच दिया।

19 नवंबर 2005 की रात वरुणा विहार स्थित मकान पर जाकर मुन्नी व उसके लड़कों पंकज उर्फ गुड्डू व संजय की हत्या कर शव को स्टोर रूम के बक्से में रखकर सभी भाग गए। अदालत ने इस मामले में विचारण के बाद दो अभियुक्तों गुलाब पाल व सुदामा गिरि को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी को नौ साल सात माह की सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) अवधेश कुमार की अदालत ने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में चांदपुर, मंडुवाडीह निवासी अभियुक्त अजय यादव को दोषी पाया है। अदालत ने अभियुक्त को नौ वर्ष सात माह के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। विशेष लोक अभियोजक चंद्रबली पाल और एडीजीसी राजीव सिन्हा व पवन जायसवाल के अनुसार सिगरा थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष शिवानंद मिश्रा ने 13 जनवरी 2014 को सिगरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि चांदपुर, मंडुवाडीह निवासी अजय यादव का एक संगठित गिरोह है।
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उसके गिरोह में ढकेहना, रोहनिया निवासी नखड़ू उर्फ अरुण चौहान, चेतगंज निवासी अमित सिंह उर्फ सोनू व धीरज पाल, कैंट निवासी शनि सोनकर उर्फ छब्बू, तेलियाबाग निवासी विशाल और मिर्जापुर के रसौली का अंकुर सिंह पटेल शामिल है। गिरोह का सरगना अजय यादव है। यह सभी लोग अपने और गिरोह के सदस्यों के आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए हत्या, लूट, हत्या का प्रयास, डकैती समेत अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इन लोगों के खिलाफ अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। इस मामले में डीएम के आदेश पर अभियुक्त अजय यादव के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत ने विचारण के बाद अजय यादव को दोषी पाया और सजा सुनाई।
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