इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की और पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने पिता-पुत्र के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद दोषसिद्ध पाकर पिता-पुत्र शंकर एवं रामजीत को उम्रकैद की सजा सुनाई। रामजीत 2017 से ही जेल में है, उसकी जमानत नहीं हुई थी।