फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महीना बाद भी कम नहीं हुईं मुसीबतें

Thu, 29 Sep 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
बाढ़ उतरे एक महीना बीत चुका है लेकिन अब भी कुछ इलाकों में पानी लगे होने की वजह से घरों पर ताले लटक रहे हैं। इन इलाकों में कीचड़, गंदगी और बजबजाते सीवर-नालों के चलते कॉलोनियों में बीमारियां फैल रही हैं। पानी में सड़न होने से गंदगी और दुर्गंध के साथ ही तरह-तरह के जहरीले जंतु घरों में घुस जा रहे हैं। डेंगू   जैसे संक्रमण का खौफ लोगों को बेचैन  किए हुए है। यहां साफ-सफाई, जल निकासी और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के नगर निगम प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ गई हैं।
विज्ञापन



सामने घाट की मारुति नगर कॉलोनी में अब भी कहीं एक तो कहीं डेढ फीट पानी लगा है। कॉलोनियों के किनारे नाले के चोक होने से गंदे पानी से इलाका घिरा हुआ है। कॉलोनियों में रहने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री के जनसंपर्क कार्यालय पर जाकर केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा से मुलाकात कर उन्हें समस्याएं भी बताई थीं। हालात यह हैं कि कॉलोनी के निवासी चंद्रमा यादव का परिवार गली में पानी लगा होने की वजह से अभी अपने घर नहीं लौट सका है। जनार्दन शांडिल्य के परिवार के सदस्य भी दूसरे के यहां शरण लिए हुए हैं। दीपक चंद्र ज्योति, नित्यानंद पाठक, अनिल मिश्रा, अरविंद, निमिश,  श्याम नारायण पटेल, परमानंद पटेल, विशाल, प्रभाकर नाथ, अभिषेक चौबे, शशि पांडेय के घरों पर भी अभी ताले लगे हैं। तमाम लोग उसी गंदे पानी के बीच से फिसल कर गिरते-उठते सब्जी-दूध की खरीदारी कर रहे हैं। कॉलोनी के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।


कॉलोनियों की सड़कों की गिट्टी बाढ़ के पानी के साथ बह गई है। इससे राह चलना दुश्वार हो गया है। जिन कॉलोनियों की सड़कें बाढ़ से सर्वाधिक चौपट हुई हैं, उनमें हरिओमनगर, जानकी नगर, पटेल नगर, गायत्री नगर, काशीपुरम आदि शामिल हैं। लोग परेशान हैं कि जलभराव खत्म होने के बाद ये सड़कें जाने कब तक दुरुस्त हो पाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें