ज्ञान प्रवाह स्थित संग्रहालय में दुर्लभ कलाकृतियों का संग्रह देखते पीएम मोदी।
ज्ञान प्रवाह में पीएम सबसे पहले संग्रहालय गए। वहां बनारसी हस्त शिल्प के अलावा पांडुलिपियों, चित्रों, आहत सिक्कों समेत अन्य दुर्लभ संग्रह को उन्होंने देखा। वहां सूर्य की अष्टधातु की प्रतिमा देख वह ठिठक गए। इस दौरान उन्होंने विशेषज्ञों से धातुओं से बनने वाली प्रतिमाओं के बारे में जानकारी भी ली। शिल्पशाला की कला कृतियों को देखने के बाद मोदी ने शिल्पियों से मुलाकात की। वहां कला को तराशने वाले बद्री प्रसाद प्रजापति, गणेश विश्वकर्मा, नंद किशोर सिंह, रामचंद्र पटेल, शक्ति सिंह, सतीश पटेल से पीएम मिले और उनके काम को सराहा। डॉ. प्रमोद गिरि ने शिल्पियों का परिचय कराया। हर्षवर्धन नेवटिया ने उनका स्वागत किया।
ज्ञान प्रवाह की संस्थापिका पद्मश्री बिमला पोद्दार की मौजूदगी में पीएम को सात किलो वजन की 12 इंच ऊंची गंगा की अष्टधातु की मूर्ति भेंट की गई। इसके अलावा आर्ट एंड प्रेजर, काशी की रामलीला, ज्ञान प्रवाह का बुलेटिन, पुरातत्व की किताबें भी पीएम को उपहार के रूप में प्रदान की गई। पीएम ने वहां कला के संरक्षण के लिए होने वाले काम की प्रशंसा की। इसके बाद प्रो. युगल किशोर मिश्र से संस्कृत ड्रामा के उत्थान पर भी संक्षिप्त चर्चा की। अंजन चक्रवर्ती, नीरज पांडेय ने संग्रहालय के बारे में जानकारी दी।
वहीं, ज्ञान प्रवाह में प्रधानमंत्री जब संग्रहालय से होकर समारोह स्थल पर पहुंचे तब वहां खड़े मुलाकातियों के बीच कथक नृत्यांगना सोनी चौरसिया के पास ठिठक गए। सोनी ने बुके भेंट कर पीएम के पैर छुए। वह कुछ बोलती इससे पहले ही पीएम ने कहा कि सोनी मैंने तुम्हारे लिए आशीर्वाद भेजा था। पत्र के साथ ही अपने ट्वीट का भी पीएम ने जिक्र किया। इस पर सोनी ने कहा -हां सर। उसी से तो मेरा हौसला बना और आपके आशीर्वाद ने संजीवनी का काम किया। मोदी ने उसे शाबाशी दी, कहा कि मेहनत करो, बहुत आगे बढ़ो। सोनी के अलावा पीएम ने पद्मश्री राहुल जैन, प्रो. युगल किशोर मिश्र, प्रो. बिदुला जायसवाल, मारुति नंदन तिवारी, प्रो. श्रीकिशोर समेत कुल 34 लोगों से मुलाकात की।