मंगलवार को तहसील में किसी बात को लेकर पेशकार और अधिवक्ताओं में मारपीट हुई थी। दोनों पक्ष ने राजातालाब थाने पर तहरीर दी, जिसमें पेशकार प्रशांत की तहरीर पर सर्वजीत भारद्वाज समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
तहसील में पेशकार और अधिवक्ताओं के बीच मारपीट के मामले ने बुधवार को तूल पकड़ लिया। मुकदमा दर्ज नहीं होने से क्षुब्ध अधिवक्ताओं ने चार घंटे तक नेशनल हाइवे को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में केस दर्ज नहीं होने पर अधिवक्ताओं ने पुलिस से अपनी तहरीर लेकर जाम समाप्त किया। अधिवक्ताओं ने गुरुवार को बैठक कर रणनीति बनाने पर जोर दिया है।
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मंगलवार को तहसील में किसी बात को लेकर पेशकार और अधिवक्ताओं में मारपीट हुई थी। दोनों पक्ष ने राजातालाब थाने पर तहरीर दी, जिसमें पेशकार प्रशांत की तहरीर पर सर्वजीत भारद्वाज समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं, सुबह जब यह बात अधिवक्ताओं को मालूम चली तो वह आक्रोशित हो गए।
राजातालाब थाना प्रभारी के खिलाफ थाने के बाहर अधिवक्ताओं ने धरना और नारेबाजी शुरू कर दी। सुबह 10 से अपराह्न 3 बजे तक धरना चला। थानाध्यक्ष ने अधिवक्ताओं से वार्ता के बाद मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया तो अधिवक्ता थाने के सामने ही राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर धरने पर बैठ गए। 3 बजे से शाम 7 बजे तक धरने पर बैठे अधिवक्ताओं को अपर पुलिस उपायुक्त गोमती जोन आकाश पटेल ने समझाने का प्रयास किया। वहीं, एडीसीपी ने केस दर्ज करने से साफ इन्कार कर दिया।
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पीड़ित अधिवक्ता सर्वजीत भारद्वाज ने कहा कि मुकदमा दर्ज न कर उनके मौलिक अधिकार का हनन किया गया है। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। जनता के हित को ध्यान में रख रास्ता खाली कर दिया गया है।
तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुनील सिंह ने बताया कि अधिवक्ता शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर मुकदमा लिखने की मांग कर रहे थे, जिसे पुलिस ने नकार दिया। राजातालाब के अधिवक्ताओं के समर्थन में अन्य अधिवक्ता भी आ गए हैं। पिंडरा तहसील, सेंट्रल बार, बनारस बार के अधिवक्ताओं ने रोष जताया।