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बेहतर होगी कानून व्यवस्था, सुधरेगा शहर का यातायात

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प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार की रात धर्म, कला और संस्कृत के लिए विख्यात बनारस की पुलिस व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन करते हुए पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को मंजूरी दे दी। लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की सफलता को देखते हुए जानकारों का यह कहना है कि बनारस में भी कानून व्यवस्था और यातायात की स्थिति पहले से बेहतर होगी। इसके साथ ही महिलाओं, युवतियों और किशोरियों को पहले से ज्यादा बेहतर सुरक्षित माहौल मिलेगा।
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रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी डॉ. चंद्रिका राय ने कहा कि बनारस देश का महत्वपूर्ण नगर है। बेहतर पुलिसिंग और चुस्त कानून व्यवस्था के लिए ही यहां पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू की गई है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए। विश्वास है कि इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी लालजी शुक्ला ने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने से शहर की कानून व्यवस्था सुदृढ़ होगी। पुलिसिंग की व्यवस्था एकीकृत हो जाएगी। न्याय दिलाने और कानून व्यवस्था का पालन कराने में पुलिस को सहूलियत मिलेगी। कानून लागू कराने में आसानी होगी। जनता की परेशानी कम हो जाएगी। कमिश्नरेट सिस्टम बनारस जैसे महत्वपूर्ण शहर के लिए अच्छी सौगात है और इसके अनेक फायदे हैं।
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रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हरीश कुमार ने कहा कि बनारस में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया जाना अच्छा निर्णय है। कानून व्यवस्था के लिए पुलिस अब और बेहतर तरीके से काम कर जनता को अच्छे परिणाम दे सकेगी। लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरेट सिस्टम के सुखद परिणाम देखने को मिले हैं। बनारस में भी कमिश्नरेट सिस्टम के अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।
पुलिस को मिलेंगे यह अधिकार
कमिश्नर प्रणाली लागू होते ही पुलिस के अधिकार बढ़ जाएंगे। आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को डीएम के फैसले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े सभी फैसले लेने का अधिकार कमिश्नर के पास होगा। डीएम के पास अटकी रहने वाली फाइलों का निपटारा जल्द हो सकेगा। इस प्रणाली में उप जिलाधिकारी और अतिरिक्त जिलाधिकारी को दी गई एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेटियल पावर पुलिस के अधीन हो जाएगी। इस तरह से पुलिस शांतिभंग की आशंका में निरुद्ध करने से लेकर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका खुद लगाने में सक्षम हो जाएगी। डीएम से इन बातों के लिए अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। इस प्रणाली के तहत पुलिस को दंड प्रक्त्रिस्या संहिता के तहत कई महत्वपूर्ण अधिकार मिल जाएंगे। इसके अलावा होटल के लाइसेंस, बार के लाइसेंस, हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी इसमें शामिल होगा। धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना या न देना, दंगे के दौरान लाठीचार्ज या फायरिंग का निर्णय भी कमिश्नर ले सकेंगे। जमीन की पैमाइश से लेकर जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण का अधिकार भी पुलिस को मिल जाएगा। सरकारी गोपनीयता भंग करने वालों पर पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकेगी।
कमिश्नरेट सिस्टम में ये होंगे पुलिस के पद
पुलिस आयुक्त या कमिश्नर - सीपी
संयुक्त आयुक्त या ज्वाइंट कमिश्नर - जेसीपी
डिप्टी कमिश्नर - डीसीपी
सहायक आयुक्त - एसीपी
पुलिस इंस्पेक्टर ङ्त पीआई
सब इंस्पेकटर - एसआई
बनाई जाएगी एक पुलिस कोर्ट
कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद दंड प्रक्त्रिस्या संहिता की धारा 151 और 107/16 के तहत पाबंद किए जाने के लिए एक पुलिस कोर्ट बनेगी। इसमें पुलिस के कानून-व्यवस्था संबंधित मिले अधिकारों का अनुपालन कराने के लिए निर्णय होगा। बाकी अन्य आपराधिक मामलों के लिए अदालत में ही सुनवाई होगी।
आवास सहित अन्य संसाधनों की करनी होगी व्यवस्था
लखनऊ में कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुआ तो वहां कमिश्नर के साथ ही 11 आईपीएस तैनात किए गए थे। इसके आधार पर माना जा रहा है कि बनारस में थानों की संख्या कम होने के कारण लखनऊ से कम संख्या में आईपीएस तैनात किए जाएंगे। इन सभी के लिए कार्यालय, वाहन, आवास सहित अन्य संसाधनों की जल्द व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके अलावा थानेदारों, क्षेत्राधिकारियों और एडिशनल एसपी को भी कमिश्नरेट सिस्टम की आधारभूत जानकारी देकर उन्हें उनकी शक्तियों, अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में प्रशिक्षित करना होगा।
खत्म हुआ पुलिस कप्तान का पद, सिर्फ ग्रामीण इलाके में एसपी
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के साथ ही जिले में पुलिस कप्तान का पद खत्म हो जाएगा। वाराणसी कमिश्नरेट में कोतवाली, आदमपुर, रामनगर, भेलूपुर, लंका, मंडुवाडीह, चेतगंज, जैतपुरा, सिगरा, कैंट, शिवपुर, सारनाथ, लालपुर-पांडेयपुर, दशाश्वमेध, चौक, लक्सा, पर्यटक और महिला थाने रहेंगे। इन 18 थानों के मुखिया पुलिस कमिश्नर होंगे। जिले के ग्रामीण इलाके के रोहनिया, जंसा, लोहता, बड़ागांव, मिर्जामुराद, कपसेठी, चौबेपुर, चोलापुर, फूलपुर और सिंधौरा थाने के मुखिया के तौर पर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधीक्षक तैनात किए जाएंगे। इस तरह से जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कानून व्यवस्था में जिलाधिकारी का दखल पूर्व की भांति यथावत रहेगा।
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