सामान्य दिनों में अलग ही हुआ करता था बारात का नजारा
हरतीरथ के विकास यादव ने बताया कि हर साल लाट भैरव बाबा की बारात विश्वेश्वरगंज से निकलकर करीब 2 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करते हुये कज्जाकपुरा स्थित मंदिर मे पहुंचता था। जिसमें बाबा शानदार रथ पर सवार होकर विराट शोभायात्रा के रुप मे हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे, डमरु दल के साथ आते थे। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह हजारों श्रद्धालुओं द्वारा बाबा की आरती के साथ साथ शृगार व पुष्प वर्षा की जाती रही।
दोपहर तीन बजे निकलने वाले इस अद्भुत बारात को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने में करीब 12 घंटे का समय लगता था। मंदिर प्रांगण मे भी बड़ी संख्या में शाम से ही भक्तों का दर्शन पूजन का क्रम शुरू होता था। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ-साथ भंडारे का आयोजन किया जाता रहा। लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण यह तीन दिवसीय आयोजन सीमित कर दिया गया।
श्रद्धालुओं को भी अखरा बाबा की बारात का सूनापन
बारात के दौरान कई वर्षों से परंपरागत आरती करने वाले श्रद्धालुओं राजेश प्रसाद, अनिता पटेल, रमेश शंकर ने बताया कि इस बार यह मार्ग बहुत ही सूना रहा। बाबा की आरती भी नहीं की गई। घरों से ही लोगों ने बाबा का मानसिक ध्यान कर उनसे संकट हरने की प्रार्थना की। हर बार इस मार्ग मे पडने वाले प्रत्येक मंदिरों की सजावट के साथ साथ प्रसाद वितरण व विविध सांस्कृतिक आयोजन किये जाते रहे। लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग था।