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Exclusive: गैस प्लांट के लिए वाराणसी के इसरवार में अधिग्रहित होगी जमीन, पूर्वांचल के 20 से ज्यादा जिलों में एलपीजी की आपूर्ति बढ़ेगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 21 Feb 2022 12:48 PM IST

सार

गुजरात के कांडला बंदरगाह से निकली गैस पाइपलाइन परियोजना मध्यप्रदेश से गोरखपुर तक पहुंची है। इस पाइपलाइन को वाराणसी में प्रस्तावित एचपीसीएल के प्लांट से जोड़ा जाना है। इसके लिए सेवापुरी के इसरवार में 11.18 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। 
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एलपीजी बॉटलिंग प्लांट - फोटो : सोशल मीडिया।

गुजरात के कांडला से निकली एलपीजी गैस पाइप परियोजना से वाराणसी को जोड़ने के लिए सेवापुरी के इसरवार गांव में जिला प्रशासन अब ढाई एकड़ जमीन का अधिग्रहण करेगा। किसानों की जमीन के सर्किल रेट कम होने की आशंका के चलते समिति इसका अध्ययन करेगी और उसी आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।  

जमीन अधिग्रहण के दो साल बाद यहां हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्लांट को गोरखपुर तक पहुंची पाइपलाइन से जोड़ दिया जाएगा। परियोजना से वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के 20 से ज्यादा जिलों में एलपीजी की आपूर्ति बढ़ जाएगी। दरअसल, गुजरात के कांडला बंदरगाह से निकली गैस पाइपलाइन परियोजना मध्यप्रदेश से गोरखपुर तक पहुंची है।



कई किसान जमीन देने को राजी नहीं
इस पाइपलाइन को वाराणसी में प्रस्तावित एचपीसीएल के प्लांट से जोड़ा जाना है। इसके लिए देश के पहले मॉडल ब्लॉक  वाराणसी के सेवापुरी के इसरवार में 11.18 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसमें करीब आठ एकड़ से ज्यादा जमीन किसानों ने स्वेच्छा से दी है, जबकि ढाई एकड़ से ज्यादा जमीन के किसान मालिक अपना भूखंड देने को राजी नहीं है।

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एलपीजी बॉटलिंग प्लांट - फोटो : सोशल मीडिया।
गुजरात के कांडला से निकली एलपीजी गैस पाइप परियोजना से वाराणसी को जोड़ने के लिए सेवापुरी के इसरवार गांव में जिला प्रशासन अब ढाई एकड़ जमीन का अधिग्रहण करेगा। किसानों की जमीन के सर्किल रेट कम होने की आशंका के चलते समिति इसका अध्ययन करेगी और उसी आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।  

जमीन अधिग्रहण के दो साल बाद यहां हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्लांट को गोरखपुर तक पहुंची पाइपलाइन से जोड़ दिया जाएगा। परियोजना से वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के 20 से ज्यादा जिलों में एलपीजी की आपूर्ति बढ़ जाएगी। दरअसल, गुजरात के कांडला बंदरगाह से निकली गैस पाइपलाइन परियोजना मध्यप्रदेश से गोरखपुर तक पहुंची है।

कई किसान जमीन देने को राजी नहीं
इस पाइपलाइन को वाराणसी में प्रस्तावित एचपीसीएल के प्लांट से जोड़ा जाना है। इसके लिए देश के पहले मॉडल ब्लॉक  वाराणसी के सेवापुरी के इसरवार में 11.18 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसमें करीब आठ एकड़ से ज्यादा जमीन किसानों ने स्वेच्छा से दी है, जबकि ढाई एकड़ से ज्यादा जमीन के किसान मालिक अपना भूखंड देने को राजी नहीं है।

ऐसे में जिला प्रशासन ने इस जमीन को अधिग्रहित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा .512 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन को भी इस परियोजना में शामिल कर लिया गया है। यहां बता दें कि इस गैस बाटलिंग प्लांट पर 194 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

अधिग्रहण से पहले कराए गए सर्वे रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सर्किल रेट कम होने के कारण किसान जमीन देने को तैयार नहीं है। ऐसे में इसके अध्ययन के साथ ही जमीन पर स्थित पेड़ सहित अन्य वस्तुओं का मुआवजा दिया जाना चाहिए। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के प्रस्ताव पर अध्ययन कराया गया है और उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की गई है। इसके बाद प्रशासन अधिग्रहण प्रक्रिया को क्रियान्वित करेगा। यह परियोजना जनहित में उपयोगी मानी गई है।

प्रशासन की वेबसाइट पर डाली गई सर्वे रिपोर्ट

इस परियोजना के लिए जमीन की आवश्यकता पूरी करने के लिए कराई गई सर्वे रिपोर्ट को जिला प्रशासन की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इसमें बताया गया कि 77 फीसदी जमीन खरीदी जाने के बाद बाकी बचे किसानों ने जमीन बेचने से मना कर दिया गया है। इनसे लगातार संपर्क किया गया, मगर वे सहमत नहीं है। जनवरी 2022 में पूरा हुए सर्वे में पूरे गांव के संसाधन और सुविधाओं पर भी अध्ययन किया गया है। ऐसे में अधिग्रहण के बाद गांव की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
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