अब तक किसी जनप्रतिनिधि या अन्य वीवीआईपी के आगमन पर हेलीकॉप्टर उतारने के लिए अस्थायी हेलीपैड का निर्माण कराना पड़ता था। वैसे अगर देखा जाए तो जिले में एक साल में लगभग आठ से 10 वीवीआईपी का आगमन होता है। इसके लिए अस्थायी हेलीपैड तैयार करने में करीब आठ लाख रुपये खर्च हो जाते थे।
वीवीआईपी के कार्यक्रम समाप्त होते ही यह हेलीपैड अनुपयोगी हो जाता था और दोबारा इस्तेमाल में नहीं आ पाता था। इससे बड़े पैमाने पर सरकारी धन व्यर्थ चला जाता था। इसको ध्यान में रखते हुए शासन ने प्रत्येक ब्लॉक और तहसील मुख्यालय पर स्थायी हेलीपैड निर्माण का निर्णय लिया है।
जिले के 14 ब्लॉक और आठ तहसीलों में कुल 18 स्थायी हेलीपैड बनाए जाएंगे। प्रत्येक हेलीपैड के निर्माण में 50 गुने 50 मीटर जमीन की तलाश जिला प्रशासन की ओर से की जा रही थी। इनमें से 12 जगहों पर जमीन मिल चुकी है। अभी छह स्थानों पर जमीन मिलनी बाकी है। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी को हेलीपैड के साथ ही 500 मीटर लंबी सड़क का भी निर्माण करना है। ताकि हेलीपैड तक पहुंच आसान हो सके।
चार स्थानों का भेजा गया स्टीमेट
पीडब्ल्यूडी की ओर से जिन जगहों पर जमीन मिल चुकी है उसका स्टीमेट बनाने का कार्य किया जा रहा है। अब तक चार जगहों का स्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा भी जा चुका है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संकर्षण लाल ने बताया कि उनकी ओर से दो स्टीमेट तैयार कर भेजा गया था लेकिन उसमें रोड को शामिल नहीं किया गया था। इसके कारण यह स्टीमेट वापस हो गया है। जल्द ही दूसरा स्टीमेट तैयार कर भेजा जाएगा।
जिले में 14 ब्लाॅक और आठ तहसील मुख्यालयों पर स्थायी हेलीपैड बनेगा। इसके लिए जहां तहसील और ब्लाक एक ही जगह हैं वहां पर एक बाकी जगहों पर अलग-अलग हेलीपैड बनाए जाएंगे। इस प्रकार कुल 18 जगहों पर हेलीपैड का निर्माण होगा। इसके लिए 12 स्थानों पर जमीन भी तलाश ली गई है। इनमें से चार का स्टीमेट तैयार करके भेज दिया गया है। शेष पर काम चल रहा है। - संजीव ओझा, मुख्य राजस्व अधिकारी।