काशी में जूडो खेल में जान फूंकने वाले महमूरगंज निवासी लाल कुमार का नाम द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया है। यूपी जूडो संघ के सीईओ मुनव्वर अंजार ने बताया कि वाराणसी के लाल कुमार और लखनऊ की सुषमा का नाम द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए प्रस्तावित किया गया है।
पंजाब के अमृतसर में पढ़ाई लिखाई और खेल कैरियर के बाद पिछले 22 सालों से 51 वर्षीय लाल कुमार सिगरा डॉ संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में अंशकालिक जूडो प्रशिक्षक रहे हैं। 1993 में जब लाल सिगरा स्टेडियम में आए तो जूडो खेल की स्थिति बेहद खराब थी। हालांकि इससे पहले जूडो का बस अस्तित्व मात्र था।
मगर लाल की लगन और जी तोड़ मेहनत ने कुछ ही वर्षों में जूडो खेल में जान डाल दी। जिसका नतीजा हुआ जिले के 50 खिलाड़ियों राष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों पदकों पर कब्जा जमा लिए। लाल यहीं नहीं रुके और खिलाड़ियों में ऐसा जोश भरा कि काशी के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी पदक पाने से नहीं चूके।
इन्होंने भट्टी गांव को जूडो विलेज के नाम से विख्यात भी किया जहां से राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने अपना लोहा देश विदेश में मनवाया। लाल की इन्हीं उपलब्धियों की बदौलत जापान की एक कंपनी ने एशियन इस्माइल नाम से लाल के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई थी। जिसमें लाल की तमाम उपलब्धियों और उनके द्वारा देश को समर्पित खिलाड़ियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।