वाराणसी। संत रविदास की 638वीं जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार की शाम तटीय शहर से गांव तक दीपों की लडि़यों से चांद-तारों की मानिंद जगमगा उठे। गंगा किनारे रविदास घाट से पार्क तक को जहां सांझ ढलते ही दीपमलाओं से रोशन कर दिया गया, वहीं सीर गोवर्धन गांव में स्वर्ण गुंबदों वाले रविदास मंदिर से लेकर अनुयायियों की ओर से लगाए गए शिविरों और घरों तक में महिलाओं ने आस्था के दीये जलाकर गुरु को नमन किया।
देश के 23 राज्यों के साथ ही दुनिया के 20 देशों से पहुंचे एनआरआई भक्त मंगलवार की सुबह आठ बजे रविदासिया धर्म के हरि निशान वाले ध्वजारोहण के क्षणों का साक्षी बनेंगे। सोमवार को देर रात दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लग गई।
रविदास मंदिर के पुजारी मनदीप दास के नेतृत्व में सोमवार की शाम छह बजे बाजेगाजे के साथ शोभायात्रा निकाल कर पंजाब-हरियाणा समेत कई इलाकों के अनुयायी रविदास पार्क पहुंचे। यहां दीपदान किया गया। झुरमुटों, पेड़ों की टहनियों से लेकर पार्क की मखमली घासों पर तारों की तरह दीये और लतर की लडि़यां टिमटिमाने लगीं।
संत की प्रतिमा के पास भजनों की गूंज पर भक्त झूमते रहे। उधर, सीर गोवर्धन गांव में लगे 70 शिविरों में दिन में जहां संस्कार और श्रद्धा, भक्ति के भजनों की गंगा पर बही। इन शिविरों में भी शाम को महिलाओं ने दीये जलाए। जगह-जगह रंगों और फूलों से चुन-चुन कर रंगोली सजाई गई।
फ्रांस की एयूड्ली और अमरीका की सुजान समेत कई विदेशी भी रविदास मंदिर में प्रार्थना सभा में शामिल हुए। हर तरफ उल्लास के बीच दोपहर बाद गुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन और डेरा सच्च खंड बल्लां के संत निरंजन दास महाराज ने मुख्य पंडाल का निरीक्षण किया।
शिविरों में पहुंचे भक्तों की भी सुध उन्होंने ली। भंडार कोठी में उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी सत्यपाल विरदी ने बताया कि मंगलवार की सुबह सात बजे पार्क में गुरु रविदास की प्रतिमा पर पुष्पांजलि से जयंती समारोह का आगाज होगा। देर रात तक बसों, ट्रकों और अन्य वाहनों से अनुयायियों के पहुंचने से जहां सीर गोवर्धन जाने वाली सड़कों पर जाम की स्थिति रही, वहीं शिविर भी श्रद्धालुओं की भीड़ से पैक हो गए।