ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मोदी सरकार के नोटबंदी की मार ब्लैक मनी रखने वालों पर कितनी पड़ी है, ये कहना तो मुश्किल है…लेकिन नोटबंदी की वजह से मजदूरों को जरूर खाने के लाले पड़ गए हैं। हालात ऐसे हो गये जिसे बयां करना थोड़ा मुश्किल है।
कई मजदूरों के काम छुट गये तो किसी को मजदूरी के बाद मेहनताना नहीं मिल रहा। नोटबंदी के फैसले के लगभग 41 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी क्षेत्र पधार रहे हैं।
उनकी आगवानी की तैयारी के लिए बिजली, मंच,पंडाल, कुर्सी व् बल्ली लगाने के लिए पिछले एक हफ्ते से सैकड़ों मजदूरों को लगाया गया।
इस काम का कांट्रेक्ट शहर के एक प्रतिष्ठित टेंट वाले ने लिया। टेंट वाले ने मंच बनाने के लिए कोलकाता से तो पंडाल बनाने के लिए दिल्ली से कारीगरों को बुलाया है। कुर्सियां और बल्ली गाड़ने के लिए स्थानीय मजदूरों को बुलाया गया है। जिनकी संख्या लगभग 100 है।
डीरेका, कबीर नगर, बीएचयू जैसी जगहों पर तैयारी की गई है। तैयारी में लगे मजदूरों को की पिछले 15 दिनों से नोटबंदी के कारण मजदूरी नहीं दी जा रही है।
अमर उजाला के सवांददाता को डीरेका मैदान पर काम में लगे मजदूरों ने बताया कि हमलोगों को बताया गया है प्रधानमंत्री के वापस लौट जाने के बाद आप लोगो को मजदूरी दी जायेगी। अभी प्रत्येक मजदूर को प्रतिदिन 50 रूपये भोजन के नाम पर दिया जा रहा है।
मजदूरों का कहना है कि पहले 500 के पुराने नोट दिए जा रहे थे जिसके चलते पुरे का सामान लेने पर ही दुकानदार सामान दे रहा था। लेकिन पिछले 3 दिनों से फुटकर 50 और 100 रूपये के नोट में मजदूरी का आंशिक हिस्सा दिया जा रहा है।