मां विशालाक्षी का 12 साल बाद कुंभाभिषेक शनिवार से तीन दिवसीय महानुष्ठान शुरू हो रहा है। शुक्रवार को सुबह नवग्रह और वास्तु पूजा कर हवन हुआ। दक्षिण भारत से आए वैदिक विद्वानें ने विधि-विधान से पूजा की। एक दिसंबर को कुंभाभिषेक का अनुष्ठान होगा।
श्रीकाशी नाटकोटई नगरम् क्षेत्रम मैनेजिंग सोसाइटी की ओर से देवी की शक्तिपीठों में एक मीरघाट स्थित मां विशालाक्षी मंदिर का नौवां कुंभाभिषेक शनिवार से शुरू होगा। सोसाइटी के उपाध्यक्ष मुतइया ने बताया कि शनिवार को दोपहर बाद तीन बजे से यज्ञ शुरू से शुरू होगा। शाम सात बजे आरती होगी। 30 नवंबर को सुबह नौ बजे से हवन, शाम 4.15 बजे से पूजा व आरती होगी। अंतिम दिन एक दिसंबर को सुबह सात से नौ बजे तक यज्ञ, 9:30 से पूजन व मंदिर की परिक्रमा, 10 से 10:20 बजे तक कुंभाभिषेक होगा। संगम के जल से अभिषेक और छह स्वर्ण कलश शिखर पर लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि माता विशालाक्षी मंदिर के गर्भगृह में दो और शक्तिपीठों की देवियों के अलावा गणेश जी और कार्तिकेय की भी प्रतिमाएं स्थापित होगी।