मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र और मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान (लमही) के संयुक्त तत्वावधान में ‘छायावाद और मुकुटधर पांडेय’ विषयक पर एक विशिष्ट व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता हिंदी विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रामनारायण पटेल ने कहा कि छायावाद सचमुच में एक सीमा रेखा है। यह एक ऐसी काव्यधारा है जो भक्तिकाल के बाद पहली बार काव्य, कला, दर्शन, इतिहास, कल्पना को लेकर चला। धन्यवाद ज्ञापन मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने किया। कार्यक्रम में अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. राजकुमार, डॉ. मानसी रस्तोगी, डॉ. लहरी राम मीणा, डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा आदि मौजूद रहे।