कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा किनारे कुंभ सी भीड़, 16 लाख ने किया स्नान
- आधी रात के बाद से ही गंगा घाटों पर शुरू हो गया स्नान
- दशाश्वमेध, पंचगंगा, अस्सी, तुलसी और मणिकर्णिका घाट पर सबसे ज्यादा भीड़
- बोले तीर्थ पुरोहित, कई सालों बाद कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ा है श्रद्धालुओं का रेला
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। हर-हर गंगे, जय-जय गंगे का जयकारा लगाता श्रद्धालुओं का रेला। उत्तरवाहिनी के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ मानों ऐसा लगा कि कुंभ का स्नान हो। 24 घंटे पहले से ही श्रद्धालुओं का रेला गंगा घाटों की ओर बढ़ चला था। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर काशी के गंगा घाटों पर 16 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। तीर्थ पुरोहितों का कहना था कि कई वर्ष बाद कार्तिक पूर्णिमा पर इतनी भीड़ हुई है।
शुक्रवार की भोर से ही गंगा के सभी 84 घाट श्रद्धालुओं से पट गए। हर-हर गंगे और हर-हर महादेव का जयकारा लगाकर श्रद्धालु डुबकियां लगा रहे थे। मध्यरात्रि के बाद से ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान शुरू कर दिया। वहीं, काफी संख्या में श्रद्धालु घाट पर ही आराम फरमा रहे थे। भोर में जैसे ही भगवान सूर्य के उदय होने का समय हुआ तो उन्होंने भी स्नान की तैयारियां शुरू कर दीं। भीड़ का आलम यह था कि दशाश्वमेध घाट पूरी तरह से पैक हो गया तो श्रद्धालु बगल के घाट की ओर बढ़ने लगे। देखते ही देखते राजेंद्र प्रसाद, अहिल्याबाई घाट और दूसरी तरफ मुंशी घाट के आगे तक स्नान करने वालों से घाट भर गया था। स्नान और दान का सिलसिला अनवरत दोपहर तक चलता रहा। दशाश्वमेध, पंचगंगा, अस्सी, तुलसी और मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने वालों की सबसे ज्यादा भीड़ थी। जितनी भीड़ गंगा इस पार थी, उतनी ही भीड़ गंगा उस पार भी स्नान के लिए उमड़ी थी। तीर्थ पुरोहित राकेश पांडेय ने बताया कि लगभग 10-12 सालों के बाद कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसी भीड़ हुई है।