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कृष्णानंद राय हत्याकांड : फैसले के बाद टूट गई परिजनों की आस, बोले- भाजपा सरकार पर था पूरा भरोसा

Fri, 05 Jul 2019 05:25 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
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भाजपा नेता कृष्णानंद राय - फोटो : amar ujala
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बहुचर्चित विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले ने जहां लोगों को चौंका दिया। वहीं, विधायक के परिवार समेत अन्य मृतकों के परिजनों में इस फैसले से निराशा व्याप्त है। उनके मन से आरोपियों को सजा मिलने की आस टूट गई है।

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साढ़े 13 साल पहले मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय 29 नवंबर 2005 को अपने छह साथियों के साथ क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने बोलेरो से मऊ की तरफ जा रहे थे। इसी बीच दिन में करीब तीन बजे भांवरकोल थाना क्षेत्र के बसनिया चट्टी पर बदमाशों ने उनके वाहन को घेर लिया था और स्वचालित हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं।

इस गोलीबारी में विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों के शरीर से कुल 67 गोलियां बरामद हुई थीं। इस वारदात से पूरा पूर्वांचल दहल उठा था। वारदात के बाद मृतकों के परिजनों की आंखों से आक्रोश के साथ अपनों के जाने का दर्द भी आंसू बनकर सालों बहते रहे। लोगों को उम्मीद थी कि कभी तो न्याय मिलेगा। लेकिन अब उनकी उम्मीदें टूट चुकी हैं।
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सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद सभी मर्माहत हैं। वारदात के वक्त आक्रोशित लोगों ने पुलिस बूथ, रेलवे फाटक, डाकखाना सहित कई दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया था। मृतक के परिजनों की सहित तमाम लोगों की सिर्फ यही पुकार थी कि वारदात के अंजाम देने वालों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

मृतकों के परिजनों सहित समर्थकों ने न्याय की उम्मीद लगाते हुए फैसला आने का इंतजार करने लगे थे। इसी क्रम में करीब साढ़े 13 वर्ष बाद बुधवार को सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस मामले में सभी आरोपियों को हरी झंडी दे दी, जिससे आरोपियों को सजा मिलने की उम्मीद लगाए मृतकों के परिजनों की आस टूट गई। 

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फैसले की लोगों में होती रही चर्चा

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से शामिल थी कि विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की वारदात पूरे देश में फैल गई थी। उस समय गीने-चुने न्यूज चैनल थे, जिनके लिए यह खबर ब्रेकिंग न्यूज बन गई थी। कई दिनों तक सिर्फ इसी वारदात की खबर प्रकाशित होती रही। उस समय प्रदेश में सपा और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।

2 दिसंबर 2005 को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह लखनऊ से न्याय यात्रा लेकर मृत विधायक के गांव गोड़उर के लिए रवाना हुए थे। जबकि छह दिसंबर को लालकृष्ण आडवाणी और केशरीनाथ त्रिपाठी मृत विधायक के गोड़उर गांव में पहुंचकर संवेदना जाहिर की थी। इतना ही नहीं, 11 दिसंबर को मृत विधायक कृष्णानंद राय के त्रयोदशाह में कलराज मिश्रा, राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह, मुरली मनोहर जोशी तथा योगी आदित्यनाथ शामिल हुए थे।

15 दिसंबर को राजनाथ सिंह की न्याय यात्रा जिले में पहुंची थी। इस मामले की खुद पूर्व मंत्री मनोज सिन्हा मॉनीटरिंग कर रहे थे। सभी दिग्गजों ने मृतकों के परिजनों को यह भरोसा दिलाया था कि लड़ाई लड़ते हुए न्याय दिलाया जाएगा। आरोपियों को हर हाल में सजा मिलेगी।

इससे परिजनों का सीना भी चौड़ा हो गया था और वह कोर्ट के फैसला का इंतजार करते रहे, लेकिन करीब साढ़े 13 वर्ष बाद आए फैसले में सभी आरोपियों को कोर्ट द्वारा क्लिन चिट दिए जाने से आरोपियों को सजा मिलने की आस लगाए परिजनों की आस टूट गई। वर्तमान समय में केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। कोर्ट के इस फैसले शायद भाजपा का दिग्गजों को भी निराशा हुई होगी।
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