पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (फाइल फोटो)
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चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से शामिल थी कि विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की वारदात पूरे देश में फैल गई थी। उस समय गीने-चुने न्यूज चैनल थे, जिनके लिए यह खबर ब्रेकिंग न्यूज बन गई थी। कई दिनों तक सिर्फ इसी वारदात की खबर प्रकाशित होती रही। उस समय प्रदेश में सपा और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।
2 दिसंबर 2005 को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह लखनऊ से न्याय यात्रा लेकर मृत विधायक के गांव गोड़उर के लिए रवाना हुए थे। जबकि छह दिसंबर को लालकृष्ण आडवाणी और केशरीनाथ त्रिपाठी मृत विधायक के गोड़उर गांव में पहुंचकर संवेदना जाहिर की थी। इतना ही नहीं, 11 दिसंबर को मृत विधायक कृष्णानंद राय के त्रयोदशाह में कलराज मिश्रा, राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह, मुरली मनोहर जोशी तथा योगी आदित्यनाथ शामिल हुए थे।
15 दिसंबर को राजनाथ सिंह की न्याय यात्रा जिले में पहुंची थी। इस मामले की खुद पूर्व मंत्री मनोज सिन्हा मॉनीटरिंग कर रहे थे। सभी दिग्गजों ने मृतकों के परिजनों को यह भरोसा दिलाया था कि लड़ाई लड़ते हुए न्याय दिलाया जाएगा। आरोपियों को हर हाल में सजा मिलेगी।
इससे परिजनों का सीना भी चौड़ा हो गया था और वह कोर्ट के फैसला का इंतजार करते रहे, लेकिन करीब साढ़े 13 वर्ष बाद आए फैसले में सभी आरोपियों को कोर्ट द्वारा क्लिन चिट दिए जाने से आरोपियों को सजा मिलने की आस लगाए परिजनों की आस टूट गई। वर्तमान समय में केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। कोर्ट के इस फैसले शायद भाजपा का दिग्गजों को भी निराशा हुई होगी।