युवक की किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली टीम।
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वाराणसी के आईएमएस बीएचयू में 14 साल बाद किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। यूरोलॉजी ऑपरेशन थियेटर में करीब छह घंटे तक चली प्रक्रिया में एक पत्नी ने अपने पति को किडनी डोनेट कर जान बचाई। ट्रांसप्लांट की इस प्रक्रिया के बाद पति और पत्नी दोनों स्वस्थ हैं। डॉक्टरों की टीम उनके सेहत की निगरानी कर रही है। इसके पहले 2010 में अंतिम बार यहां किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था।
बीएचयू अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में करीब दो साल पहले मड़ाव रोहनिया निवासी 39 वर्षीय युवक दिखाने आया। यहां प्रो. समीर त्रिवेदी, डॉ. यशस्वी की टीम ने जांच की। डॉक्टरों ने पाया कि उसकी दोनों किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है।
इसके बाद नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. शिवेंद्र सिंह के निर्देशन में डायलिसिस चनी। युवक की किडनी ट्रांसप्लांट करने की डॉक्टरों ने सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों से बातचीत की। 34 वर्षीय पत्नी ने अपनी किडनी दान करने की बात कही। गुरुवार को ट्रांसप्लांट किया गया।
आईएमएस निदेशक की मौजूदगी में छह घंटे चली प्रक्रिया
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के छठवें तल पर स्थित यूरोलॉजी की ओटी में ऑपरेशन सुबह करीब 11 बजे से शाम 5 बजे तक चला। आईएमएस बीएचयू के निदेशक और यूरोलॉजिस्ट प्रो. एसएन संखवार की मौजूदगी में यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. समीर त्रिवेदी, डॉ. उज्जवल कुमार, डॉ. यशस्वी और नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. शिवेंद्र सिंह ने ट्रांसप्लांट करवाया।
बोले अधिकारी
आईएमएस बीएचयू में अब किडनी ट्रांसप्लांट की राह खुल गई है। यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनीस्थीसिया विभाग की टीम ने सराहनीय कार्य है। इसके लिए ओटी में हाइटेक उपकरण सहित अन्य व्यवस्थाएं कराई जाएंगी।
- प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू