वाराणसी। बजट में कटौती होने से इस सीजन में ट्राइको डर्मा और ब्यूवेरिया बैसियाना का उत्पादन घट गया है। इससे जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए दिक्कत आएगी। किसानों को फसलों को दीमक और फफूद से बचाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा।
चांदपुर स्थित मंडल के इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट लैब के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष 31000 किलो ट्राइको डर्मा उत्पादन किया गया था। ये वाराणसी मंडल सहित विंध्याचल और फैजाबाद मंडलों के 10 जिलों में वितरित किया गया। इसके लिए 40 लाख रुपये से अधिक का बजट था। मगर इस सीजन में केवल 37 प्रतिशत उत्पादन के लिए 20 लाख 38 हजार 750 के करीब बजट मिला है।
काशी विद्यापीठ स्थित कृषि रक्षा इकाई के वरिष्ठ सहायक प्राविधिक अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष जिले के फफूद नाशक 1537 किलो ट्राइको डर्मा और दीमक नाशक 459 किलो ब्यूवेरिया बैसियाना का वितरण 875 किसानों में किया गया था। जनपद में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या में इजाफा को देखते हुए ट्राइको डर्मा और ब्यूवेरिया बैसियाना की मांग काफी बढ़ी है। नमामि गंगे के तहत जिले में तीन हजार के करीब जैविक खेती करने वाले किसान पंजीकृत हैं। जिनमें 800 किसानों में तीन हजार किलो ट्राइको डर्मा वितरण का लक्ष्य है। संदहा के मनीष, उचगांव के जयसिंह और अलाउद्दीनपुर के छोटेलाल ने बताया कि अभी फिलहाल हमारे पास पहले का स्टाक है, जिससे काम चल जा रहा है। मगर आने वाले दिनों में जरूरत होने पर निजी कंपनियों के दवाओं का सहारा लेना पडे़गा।
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70 से 100 प्रतिशत अनुदान पर मिलता है किसानों को
फफूंद नाशक ट्राइको डर्मा और दीमक नाशक ब्यूवेरिया बैसियाना जिले के सभी विकास खंडों में और चांदपुर स्थित कृषि रक्षा केंद्र पर सामान्य किसान को 70 प्रतिशत और नमामि गंगे के तहत पंजीकृत किसान को 100 प्रतिशत अनुदान पर दिया जाता है। वैसे इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो की दर से है।
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कोरोना की वजह से रबी के सीजन के लिए ट्राईको डर्मा और ब्यूवेरिया बैसियाना का उत्पादन 37 प्रतिशत ही हो सका है। बजट कम होने से उत्पादन पर असर पड़ा है। इससे जैविक खेती करने वाले किसान प्रभावित होंगे।
-अखिलेश चंद शर्मा, संयुक्त कृषि निदेशक