इनके बाद पटना से आए मशहूर कवि व शायर अमृतेश मिश्रा ने भी अपनी रचनाओं से देर तक युवाओं में जोश भरा। सुनाया, किसी भी चांद से टुकड़े पर सोणा तिल नहीं देना, खुदा अगर जिंदगी देना तो देना मगर दिल नहीं देना...। इस पर युवाओं की खूब तालियां मिलीं।
इसी तरह डॉ. भावना श्रीवास्तव, कुशल दौनैरिया, अभिसार गीता, कृति चौबे, हिमांशु तिवारी, और आशुतोष कुमार ने अपनी रचनाओं से महफिल में चार चांद लगाया। बीएचयू के छात्र व युवा कवि रजनीश विश्वकर्मा राज ने सुनाया, जब वो रास्ते नया बनाता है, सारी दुनिया से प्यार पाता है.. सबसे जो जीतता है वो लड़का एक लड़की से हार जाता है...। संचालन मयंक तिवारी ने किया। कार्यक्रम का संयोजन आचार्य अश्विनी सरकार, डॉ. विंध्याचल यादव, गौरव प्रताप सिंह ने किया। तर्ज-ए-सुखन के सदस्य संदीप गुप्ता, दीपेश कुमार, अभिनव, अभिषेक भारती, अभिषेक झा, नितिन यादव, कोरल, अनुपमा, प्रिंस, शुभांगी, ओमी, सत्यम, रौशन की कार्यक्रम में सराहनीय भूमिका रही।