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Varanasi News: संगीत की त्रिवेणी से सजी कौस्तुभ जयंती की शाम, 75 कलाकारों को मिला सम्मान; शिव को किया नमन

Fri, 23 Aug 2024 12:10 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: कौस्तुभ जयंती के अवसर पर बीएचयू में आयोजित सांस्कृतिक संध्या का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कथक और भरतनाट्यम की प्रस्तुति के बाद खूब तालियां बजीं।
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कौस्तुभ जयंती समारोह में कथक प्रस्तुत करतीं छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय ने 75वें वर्ष में प्रवेश कर लिया। इस उपलक्ष्य में संकाय में तीन दिवसीय कौस्तुभ जयंती समारोह का शुभारंभ हुआ। गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी बही। श्रीविश्वनाथाष्टकम् और शिव पंचाक्षर स्तोत्रम की नृत्यमय प्रस्तुति से भगवान शिव की आराधना की गई। वहीं, 75 विशिष्टजनों को कौस्तुभ रत्न से सम्मानित किया गया।

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मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन और विशिष्ट अतिथि संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने शुभारंभ किया। पं. चित्तरंजन ज्योतिषी, पं. साजन मिश्र, डॉ. राजेश्वर आचार्य, पं. शिवनाथ मिश्रा, डॉ. प्रेमचंद्र होम्बल, पं. रित्विक सान्याल सहित 75 विशिष्टजनों को कौस्तुभ रत्न सम्मान दिया गया। 

संगीतमय संध्या का शुभारंभ शिव संकल्पमस्तु की प्रस्तुति से हुआ। संकाय प्रमुख प्रो. संगीता पंडित और डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने राग पटदीप में निबद्ध अनहद बाजे, री सखी सुनहुं पियारे, राग मियां की मल्हार में द्रुत एकताल में तराना पेश किया। तबले पर आनंद मिश्रा और संवादिनी पर हर्षित अध्याय ने संगत की। 
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डॉ. राकेश कुमार व प्रशांत मिश्र वायलिन, बुधादित्य प्रधान सितार, सिद्धार्थ मुखर्जी व अशेष कुमार मिश्र ने तबला पर सधी प्रस्तुति से सभी को आनंदित किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रवीण उद्धव ने किया।

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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा जनमन। - फोटो : अमर उजाला
नृत्य की मोहक प्रस्तुति
नृत्य विभाग के शोध छात्रों ने कथक और भरतनाट्यम की मोहक प्रस्तुति की। डॉ. विधि नागर के निर्देशन में श्री विश्वनाथाष्टकम में गंगा तरंग रमणीय जटाकलापं... से भगवान शिव की आराधना की। शिव पंचाक्षर स्तोत्रम पर नृत्य पेशकर गुरु बंदगी की। समापन तिल्लाना के साथ हुआ। 

गायन में डॉ. इंद्रदेव चौधरी, तबले पर डॉ. अमित ईश्वर, बांसुरी पर डॉ. शानिश ज्ञावाली, सितार पर डॉ. आनंद मिश्रा, सारंगी पर अनिश मिश्रा ने कुशल संगत की। जबकि भरतनाट्यम में नागरंजीता एस, रूपम रघुवंशी, कथक में अमृत मिश्रा, रागिनी कल्याण, शिखा रमेश, सुरैया इस्लाम की प्रस्तुति रही। 
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