श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेशद्वार और कॉरिडोर का निर्माण नागर शैली में किया जाएगा। हिंदू स्थापत्यकला की यह एक प्राचीन शैली है। इतिहासकारों के अनुसार गुप्तकाल में इसी शैली से मंदिर बनाए जाते थे। मंदिर कॉरिडोर के लिए अगले माह टेंडर होने वाला है।
इस लिए कंसलटेंट कंपनी को उस आधार पर ही पूरा नक्शा तैयार करने के लिए निर्देश दिया गया है। इसलिए जल्द ही इसकी डिजाइन भी तैयार होने की संभावना है। काशी का विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ का मंदिर, जग्गनाथ मंदिर सहित कई अन्य मंदिर नागर शैली में बने हुए हैं। इसलिए 25 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में होने वाले श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के सभी निर्माण भी नागर शैली में कराने की तैयारी है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह ने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर नागर शैली में बना है। इसलिए कॉरिडोर के होने वाले सभी निर्माण कार्य उसी शैली में कराए जाएंगे। अगले माह तक कॉरिडोर निर्माण के लिए टेंडर होना है। उससे पहले नक्शा तैयार कर लिया जाएगा।
क्या है नागर शैली
नागर शैली उत्तर भारतीय हिंदू स्थापत्य कला की प्रमुख तीन कलाओं नागर शैली, द्रविड़ शैली और वेसर शैली में से एक है। हिमालय पर्वत से लेकर विंध्य पवर्तमाला के बीच अधिकांश मंदिर इसी शैली में मिलते हैं। विशिष्ट योजना और विमान इस शैली की दो बड़ी खासियत हैं।
त्रिरथ, सप्तरथ और नवरथ निर्माण किए जाते हैं। विकसित नागर मंदिर में गर्भगृह, उसके समक्ष क्रमश: अन्तराल, मंडप और अर्द्ध मंडप होते हैं। एक ही अक्ष पर एक दूसरे से संलग्न इन भागों का निर्माण किया जाता है। परमार शासकों ने भी वास्तुकला के क्षेत्र में नागर शैली को प्रधानता देते हुए मंदिरों का निर्माण करावाया।
राजस्थान से मंगाए जाएंगे पत्थर
नागर शैली के लिए राजस्थान से पत्थर मंगाए जाएंगे। कॉरिडोर के भव्य प्रवेश द्वार, यज्ञशाला, भोज शाला, विग्रहों का पुर्नस्थापन, सभागार आदि का निर्माण इसी शैली में होगा। इसलिए मंदिर की ओर से तय की गई कंसलटेंट कंपनी एचसीपी इंडिया लिमिटेड भी उसी आधार पर एक माह के अंदर पूरा नक्शा बनाकर दे देगी।
इतिहास विभाग (बीएचयू) के प्रो. एमपी अहिरवार ने कहा कि उत्तर भारत के अधिकतर मंदिर नागर शैली के होते हैं। इस शैली की विशेषता क्रमश: ऊपर की दिशा में पतले होते शिखर हैं। इनका आकार पिरामिड जैसा होता है। शिखर पर या तो कलश होता है या फिर उन पर ध्वज लगा होता है।