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काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर निर्माण को लेकर तमाम शंकाएं हुईं दूर, ऐसा होगा स्वरूप

Tue, 16 Oct 2018 10:54 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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श्रीकाशी विश्वनाथ  कॉरिडोर के स्वरूप को लेकर जो शंकाए थीं, वह गुरुवार को दूर हो गईं। कंपनी की ओर से तय किए गए संभावित प्लान में  न तो कॉरिडोर के पूरे हिस्से को तोड़कर हटाया जाएगा और न ही पूरा कंक्रीट का जंगल बनेगा। इस पूरे कॉरिडोर में मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए ही निर्माण किया जाएगा। कॉरिडोर में चार से पांच बड़े परिसर रहेंगे, जिसमें बड़े बड़े आयोजन भी हो सकेंगे।
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मंदिर कॉरिडोर को लेकर एचसीपी कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि हम लोगों का जो प्लान है, उसमें सुप्रसिद्ध धरोहर स्वरूप गलियां भी रहेंगी। बस उन्हेें चौड़ा किया जाएगा। मंदिर परिसर के आस-पास चार से पांच बड़े मैदान होंगे। इसमें एक ज्ञानवापी, तो दूसरा मंदिर परिसर। इसके अलावा तीसरा नीलंकठ गली के पास कॉरिडोर का सबसे बड़ा परिसर होगा, इसमें एक समय में हजारों श्रद्धालु आ सकेंगे।

इस परिसर के अगल-बगल धर्मशाला और वेटिंग रूम बनेंगे। गंगा तट से चलने के बाद एक और परिसर होगा, जहां श्रद्धालुओं के लिए हर व्यवस्था होगी। गंगा तट से मंदिर तक आने के लिए सीढि़यों के साथ रैंप भी होगा। वहीं, गोयनका लाइब्रेरी और 43 मंदिरों को संरक्षित किया जाएगा। इस नक्शे के अनुसार सभी प्रवेश द्वार पत्थरों से सुसज्जित डिजाइन के साथ बनाए जाएंगे। 
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गुजरात की कंपनी कराएगी कॉरिडोर का निर्माण

श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण अहमदाबाद की कंपनी एचसीपी इंडिया लिमिटेड की देखरेख में किया जाएगा। कंसलटेंट कंपनी का चयन गुरुवार की शाम वीडीए के सभागार में खोली गई फाइनेंसियल बिड से तय किया गया। इसमें एचसीपी को कुल 79.6 अंक मिले, जबकि दूसरी कंपनी प्लानर इंडिया 69.6 अंक ही प्राप्त कर सकी। इस बिड के खुलने के बाद एचसीपी को काम करने की जिम्मेदारी तय कर दी गई। अब इस कॉरिडोर के निर्माण का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले माह करेंगे।
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गंगा घाट से नहीं दिखेगा मंदिर

जिन लोगों के मन में था कि गंगा किनारे से देखने पर विश्वनाथ मंदिर का शिखर दिखेगा, वह भी संभव नहीं है। गंगा घाट से मंदिर परिसर की ऊंचाई करीब 100 फीट से भी अधिक है। ऐसे में गंगा किनारे से मंदिर दर्शन संभव नहीं है। 
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