श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का खजाना तेजी से बढ़ रहा है। दस साल पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के बैंक खाते में मात्र सात करोड़ रुपये थे लेकिन ताजी रिपोर्ट के मुताबिक श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए गुप्तदान और मंदिर की हुंडियों से निकली रकम को मिलाकर के बैंक खाते में जमा रकम सौ करोड़ पार कर गई है।
चंदौली जिले के सकलडीहा, मिर्जापुर के ककराही और बनारस के शिवपुर क्षेत्र स्थित विशाल तालाब और भूखंड के अलावा दान में मिले सोना-चांदी और अन्य अचल संपत्तियों को शामिल कर लिया जाए तो बाबा की कुल संपत्ति अरबों में है।
काशी विश्वनाथ मंदिर का बैंक बैलेंस दस सालों में 14 गुना से भी अधिक बढ़ा है। वर्ष 2007 में विश्वनाथ मंदिर के खाते में मात्र सात करोड़ रुपये थे। पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि साल दर साल मंदिर में चढ़ावे का अनुपात बढ़ रहा है।
मंदिर न्यास परिषद और सरकार की ओर से प्रस्तावित योजनाओं के मूर्तरूप लेने के बाद इसकी पूरी उम्मीद है कि अगले पांच वर्ष में ही मंदिर का बैंक बैलेंस मौजूदा बैलेंस से बीस गुना से अधिक हो जाए।
10 से 15 हजार लोग खड़े हो सकेंगे एक साथ
सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में सुविधाओं के विकास से श्रद्धालुओं को खासी सहूलियतें होंगी। मंदिर के चारों ओर चौड़ा रास्ता होने के साथ ही परिसर में दस से 15 हजार श्रद्धालु एक साथ खड़े हो सकेंगे। प्रस्तावित योजनाओं में विश्वनाथ कॉरिडोर, विश्वनाथ मंदिर से गंगा दर्शन से लेकर धर्मशाला, अतिथिशाला, अन्नक्षेत्र का निर्माण आदि शामिल हैं।
सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया
काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण के तहत परिक्षेत्र के सौंदर्यीकरण और गंगा-पाथवे सहित अन्य प्रस्तावित योजनाओं के लिए 650 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है।
प्रस्तावित योजनाओं को मूर्तरूप देने के लिए खरीदे जा रहे मंदिर परिक्षेत्र के भवनों की रजिस्ट्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के बजाए अब राज्यपाल के नाम कराई जा रही है। प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य की ओर से इसका आदेश जारी होने के बाद अब तक दो भवनों की स्टांप फ्री रजिस्ट्री राज्यपाल के नाम हुई है।
उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री होने से संपत्ति की उपयोगिता सरकार बिना किसी हस्तक्षेप के तय कर सकेगी। साथ ही, सरकार के पैसे से इन भवनों की खरीद होने के नाते संपत्ति का मालिकाना हक भी सरकार का होगा।
विभिन्न प्रस्तावित योजनाओं को मूर्तरूप देने के लिए मंदिर परिक्षेत्र के 160 भवनों का अधिग्रहण किया जाना है। अब तक 35 भवनों की रजिस्ट्री हुई है। इनमें पहले की 33 रजिस्ट्रियां श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के नाम हुई हैं जबकि प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य के नए आदेश के बाद दो भवनों की रजिस्ट्री राज्यपाल के नाम कराई गई है।
ये दोनों भवन क्रमश: 60 लाख और 37 लाख रुपये में तीन दिन पहले खरीदे गए। राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री होने पर स्टांप शुल्क देय नहीं होता। जबकि, सामान्य तौर पर रजिस्ट्री में सात प्रतिशत स्टांप शुल्क देना होता है।
शुक्रवार को दो और भवनों की रजिस्ट्री कराने मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी/वीडीए सचिव विशाल सिंह पहुंचे थे। बैनामे के कागजात पर सात अधिकारियों के हस्ताक्षर होने थे लेकिन एडीएम वित्त समेत तीन अधिकारियों के मौजूद न होने से रजिस्ट्री नहीं हो पाई।