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काशी विश्वनाथ: एसडीएम शंभू शरण के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश, मंदिर परिसर में मारपीट का आरोप, जानें मामला

Sat, 19 Sep 2026 11:49 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में मारपीट और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के आरोप में एसडीएम शंभू शरण के खिलाफ कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोप है कि 16 फरवरी की रात एसडीएम की मौजूदगी में करीब 10 निजी बाउंसरों ने मंदिर परिसर में मारपीट की। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) ने अगली सुनवाई तीन नवंबर को तय की।
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एसडीएम शंभू शरण के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के दौरान मारपीट और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के आरोप में एसडीएम शंभू शरण के खिलाफ कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) सुधाकर राय की अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख तय की है।

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फुलवरिया कैंट निवासी बाबूलाल सोनकर ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि वह अनुसूचित जाति से हैं। 16 फरवरी की रात करीब साढ़े 12 बजे वह अपने मित्र अनुज पांडेय के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने गए थे। प्रार्थना पत्र के अनुसार, मंदिर परिसर में एसडीएम शंभू शरण करीब 10 निजी बाउंसरों के साथ मौजूद थे। आरोप है कि उस दौरान भक्तों के साथ धक्का-मुक्की की जा रही थी।

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बाबूलाल के मुताबिक, इसी दौरान एसडीएम ने उसे पहचान लिया और कथित तौर पर बाउंसरों से जबरन पकड़वा लिया। आरोप है कि इसके बाद उसके साथ गालीगलौज की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। बाबूलाल ने अदालत को बताया कि आरोपित अधिकारी ने कथित तौर पर उसका गला दबाने का भी प्रयास किया।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि बाबूलाल के साथ मौजूद अनुज पांडेय ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उसके साथ भी मारपीट की गई और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। घटना के बाद बाबूलाल ने संबंधित थाने में शिकायत की। इसके बाद पुलिस अधिकारियों से भी कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन आरोप है कि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस स्तर से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए बाबूलाल सोनकर ने अदालत की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) सुधाकर राय की अदालत ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने प्रकरण में अगली सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख निर्धारित की है। मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान सामने आएगा।
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