बाबूलाल के मुताबिक, इसी दौरान एसडीएम ने उसे पहचान लिया और कथित तौर पर बाउंसरों से जबरन पकड़वा लिया। आरोप है कि इसके बाद उसके साथ गालीगलौज की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। बाबूलाल ने अदालत को बताया कि आरोपित अधिकारी ने कथित तौर पर उसका गला दबाने का भी प्रयास किया।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि बाबूलाल के साथ मौजूद अनुज पांडेय ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उसके साथ भी मारपीट की गई और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। घटना के बाद बाबूलाल ने संबंधित थाने में शिकायत की। इसके बाद पुलिस अधिकारियों से भी कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन आरोप है कि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस स्तर से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए बाबूलाल सोनकर ने अदालत की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) सुधाकर राय की अदालत ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने प्रकरण में अगली सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख निर्धारित की है। मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान सामने आएगा।