ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और वीडियोग्राफी के पहले दिन कोर्ट कमिश्नर को प्रतिवादी पक्ष ने मस्जिद बैरिकेडिंग के आगे नहीं जाने दिया। प्रतिवादी पक्ष के वकील ने दलील देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश में कहीं नहीं है कि बैरिकेडिंग के अंदर कोर्ट कमिश्नर सर्वे करेंगे। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता अभयनाथ यादव व एखलाक अहमद ने कहा कि हम कोर्ट कमिश्नर की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं और कोर्ट में उन्हें बदलने की अर्जी देंगे।
शुक्रवार को ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और वीडियोग्राफी के पहले दिन अधिवक्ता प्रतिवादी पक्ष ने आरोप लगाया कि कोर्ट कमिश्नर एक-एक चीज को उंगली से कुरेद रहे थे, जबकि कोर्ट द्वारा किसी चीज को कुरेदने या खोदने का आदेश नहीं है। इसलिए इस कार्यवाही से हम संतुष्ट नहीं हैं।
अधिवक्ता प्रतिवादी पक्ष ने बताया कि मैंने कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हुए एक प्रार्थना पत्र उन्हें दिया कि आप का व्यवहार निष्पक्ष नहीं है। आप पार्टी के रूप में यहां कार्यवाही करने के लिए आ रहे हैं। आप पर मुझको कोई भरोसा नहीं है और कल मैं इसी आशय का प्रार्थना पत्र कोर्ट में भी दूंगा।
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे के दौरान हंगामा
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चार बजे कमीशन की कार्यवाही शुरू हुई और पश्चिमी तरफ जो चबूतरा है, उसकी वीडियोग्राफी कराई गई है। उसके बाद कोर्ट कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद के प्रवेश द्वार को खुलवा कर अंदर जाने का प्रयास किया, जिस पर मैंने अपना विरोध दर्ज करवाया।
अधिवक्ता ने बताया कि मैंने कहा कि कोर्ट का इस तरह का कोई आदेश नहीं है की बैरिकेडिंग के अंदर जाकर आप उसकी वीडियोग्राफी कर सकें। अधिवक्ता आयुक्त ने कहा कि मुझे ताला खुलवाकर उसकी वीडियोग्राफी करने का आदेश है, जबकि ऐसा कोई आदेश कोर्ट द्वारा नहीं है।
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे शुरू होने के पहले अंजुमन इंतजामिया मसाजिद प्रबंध समिति के पक्ष के वकीलों ने कमीशन को मस्जिद के अंदर जाने से रोक दिया। इसके चलते करीब एक घंटे तक वादी पक्ष व विपक्ष में बहस होती रही। पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर माहौल को शांत किया। करीब पौने चार घंटे परिसर में वीडियोग्राफी करने के साथ बारीकी से वस्तुस्थिति की जांच की। कमीशन की कार्यवाही शनिवार को भी जारी रहेगी। इसके बाद सर्वे की रिपोर्ट तैयार कर अधिवक्ता आयुक्त उसे 10 मई को सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पहुंचे
कमीशन की कार्रवाई के दौरान निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम पहुंची। वादी पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, पंकज गुप्ता व शिवम शुक्ल भी मौके पर मौजूद रहे। हरिशंकर जैन ने अयोध्या राम मंदिर मुकदमे में भी हिंदू महासभा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बहस की थी।
ज्ञानवापी मस्जिद से मूल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को मुक्त कराने के लिए मूल वाद दाखिल करने वाले मुख्य पक्षकार पं. हरिहर पांडेय ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से क्यों डर रहे हैं। कोर्ट ने तथ्यों की जानकारी के लिए सर्वेक्षण एवं जांच करने का आदेश दिया है। प्रतिवादी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर अकारण विवाद करना चाहते हैं जो यह किसी भी स्तर से उचित नहीं है।
हरिहर पांडेय ने कहा कि न्यायालय के न्याय पर मुझे पूर्ण विश्वास है। मैं शासन से अपील करता हूं कि न्यायालय का प्रतिरोध करने वाले के ऊपर तत्काल कानूनी एवं दंडनीय कार्रवाई की जाए। हरिहर पांडेय ने बताया कि 1991 में ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने के लिए मैंने, सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा ने मुकदमा दायर किया था। अदालत में मुकदमा दायर होने के कुछ साल बाद पं. सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा का निधन हो गया।