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ज्ञानवापी परिसर का सर्वे: कोर्ट कमिश्नर के मस्जिद में प्रवेश करने से प्रतिवादी पक्ष नाराज, लगाया पक्षपात का आरोप

Sat, 07 May 2022 11:56 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

भारी गहमागहमी और सुरक्षा के बीच शुक्रवार दोपहर बाद कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा ने पक्षकारों की मौजूदगी में ज्ञानवापी परिसर में सर्वे शुरू किया। कोर्ट कमिश्नर को बदलने के लिए प्रतिवादी पक्ष के वकील आज अदालत में अर्जी देंगे। 
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ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने वाली टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अदालत के आदेश पर वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का काम भारी गहमागहमी और सुरक्षा के बीच शुक्रवार से शुरू हो चुका है।  ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और वीडियोग्राफी के पहले दिन कोर्ट कमिश्नर को प्रतिवादी पक्ष ने मस्जिद बैरिकेडिंग के आगे नहीं जाने दिया। प्रतिवादी पक्ष के वकील ने दलील देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश में कहीं नहीं है कि बैरिकेडिंग के अंदर कोर्ट कमिश्नर सर्वे करेंगे।

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प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता अभयनाथ यादव व एखलाक अहमद ने कहा कि हम कोर्ट कमिश्नर की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं और कोर्ट में उन्हें बदलने की अर्जी देंगे।  शुक्रवार को ज्ञानवापी परिसर के सर्वे और वीडियोग्राफी के पहले दिन अधिवक्ता प्रतिवादी पक्ष ने आरोप लगाया कि कोर्ट कमिश्नर एक-एक चीज को उंगली से कुरेद रहे थे, जबकि कोर्ट द्वारा किसी चीज को कुरेदने या खोदने का आदेश नहीं है।

इसलिए इस कार्यवाही से हम संतुष्ट नहीं हैं। अधिवक्ता प्रतिवादी पक्ष ने बताया कि मैंने कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हुए एक प्रार्थना पत्र उन्हें दिया कि आप का व्यवहार निष्पक्ष नहीं है। आप पार्टी के रूप में यहां कार्यवाही करने के लिए आ रहे हैं। आप पर मुझको कोई भरोसा नहीं है और कल मैं इसी आशय का प्रार्थना पत्र कोर्ट में भी दूंगा।

'कोर्ट का इस तरह का कोई आदेश नहीं' 

चार बजे कमीशन की कार्यवाही शुरू हुई और पश्चिमी तरफ जो चबूतरा है, उसकी वीडियोग्राफी कराई गई है। उसके बाद कोर्ट कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद के प्रवेश द्वार को खुलवा कर अंदर जाने का प्रयास किया, जिस पर मैंने अपना विरोध दर्ज करवाया।

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अधिवक्ता ने बताया कि मैंने कहा कि कोर्ट का इस तरह का कोई आदेश नहीं है की बैरिकेडिंग के अंदर जाकर आप उसकी वीडियोग्राफी कर सकें। अधिवक्ता आयुक्त ने कहा कि मुझे ताला खुलवाकर उसकी वीडियोग्राफी करने का आदेश है, जबकि ऐसा कोई आदेश कोर्ट द्वारा नहीं है। 

पहले दिन हुआ काफी हंगामा, आज तीन बजे से फिर होगा सर्वे
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के पहले दिन काफी हंगामा हुआ। मां शृंगार गौरी की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई। सर्वे करने के बाद लौटे अधिवक्ताओं ने बताया कि पहले दिन मस्जिद परिसर में लगी बैरिकेडिंग के अंदर जाने से हमें दूसरे पक्ष ने रोक दिया । वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर शनिवार की शाम को तीन बजे दोबारा सर्वे के लिए बैरिकेडिंग के अंदर जाएंगे। उन्होंने कोर्ट के आदेश के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को स्थिति से अवगत करा दिया है। 

सर्वे के लिए पहुंची टीम - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने परिसर का सर्वे किया। वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाषनंदन चतुर्वेदी ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी का कार्य किया गया।

इसमें शृंगार गौरी का सर्वे और वीडियोग्राफी पूरी करवा ली गई है। कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने बैरिकेडिंग के अंदर नहीं जाने दिया और हमें मना कर दिया। ऐसे में हम वापस लौट आए हैं। कोर्ट कमिश्नर ने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट से बात की है। प्रतिवादी पक्ष सर्वे को लटकाना चाहते हैं। 

नजर आईं खुफिया विभाग की खामियां

ज्ञानवापी परिसर का सर्वे के खिलाफ नारेबाजी - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे व वीडियोग्राफी के लिए सुबह से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। परिसर को पूरी तरह से होर्डिंग व पर्दे से ढंक दिया गया। पुलिस बेवजह भीड़ लगाने वालों को हटाती रही। सर्वे की कार्यवाही के दौरान मैदागिन से गौदौलिया तक नो व्हीकल जोन कर दिया गया था और दोपहिया तथा साइकिल सवारों को भी भी पुलिस ने चौराहे से आगे नहीं बढ़ने दिया।  

हालांकि ज्ञानवापी सर्वे के दौरान कई जगहों पर खुफिया विभाग की खामियां खुलकर सामने आ गईं। बिना किसी सूचना के परिसर में दो हजार से ज्यादा लोग जमा हो गए और पुलिस को इसकी भनक बाद में लगी।  वहीं दूसरी तरफ सड़क पर धार्मिक नारेबाजी के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल खराब होने से बचा। स्थानीय लोगों के बीचबचाव से मामला शांत हुआ। क्षेत्र के आसपास की गलियों में भी लोगों का दोपहर से देर शाम तक जमावड़ा लगा रहा।
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ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से क्यों डर रहे हैं : हरिहर पांडेय

ज्ञानवापी मस्जिद से मूल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को मुक्त कराने के लिए मूल वाद दाखिल करने वाले मुख्य पक्षकार पं. हरिहर पांडेय ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से क्यों डर रहे हैं। कोर्ट ने तथ्यों की जानकारी के लिए सर्वेक्षण एवं जांच करने का आदेश दिया है। प्रतिवादी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर अकारण विवाद करना चाहते हैं जो यह किसी भी स्तर से उचित नहीं है।

हरिहर पांडेय ने कहा कि न्यायालय के न्याय पर मुझे पूर्ण विश्वास है। मैं शासन से अपील करता हूं कि न्यायालय का प्रतिरोध करने वाले के ऊपर तत्काल कानूनी एवं दंडनीय कार्रवाई की जाए। हरिहर पांडेय ने बताया कि 1991 में ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने के लिए मैंने, सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा ने मुकदमा दायर किया था। अदालत में मुकदमा दायर होने के कुछ साल बाद पं. सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा का निधन हो गया। 
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