अधिवक्ता ने बताया कि मैंने कहा कि कोर्ट का इस तरह का कोई आदेश नहीं है की बैरिकेडिंग के अंदर जाकर आप उसकी वीडियोग्राफी कर सकें। अधिवक्ता आयुक्त ने कहा कि मुझे ताला खुलवाकर उसकी वीडियोग्राफी करने का आदेश है, जबकि ऐसा कोई आदेश कोर्ट द्वारा नहीं है।
पहले दिन हुआ काफी हंगामा, आज तीन बजे से फिर होगा सर्वे
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के पहले दिन काफी हंगामा हुआ। मां शृंगार गौरी की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई। सर्वे करने के बाद लौटे अधिवक्ताओं ने बताया कि पहले दिन मस्जिद परिसर में लगी बैरिकेडिंग के अंदर जाने से हमें दूसरे पक्ष ने रोक दिया । वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर शनिवार की शाम को तीन बजे दोबारा सर्वे के लिए बैरिकेडिंग के अंदर जाएंगे। उन्होंने कोर्ट के आदेश के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को स्थिति से अवगत करा दिया है।
सर्वे के लिए पहुंची टीम
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने परिसर का सर्वे किया। वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाषनंदन चतुर्वेदी ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी का कार्य किया गया।
इसमें शृंगार गौरी का सर्वे और वीडियोग्राफी पूरी करवा ली गई है। कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने बैरिकेडिंग के अंदर नहीं जाने दिया और हमें मना कर दिया। ऐसे में हम वापस लौट आए हैं। कोर्ट कमिश्नर ने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट से बात की है। प्रतिवादी पक्ष सर्वे को लटकाना चाहते हैं।
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे के खिलाफ नारेबाजी
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे व वीडियोग्राफी के लिए सुबह से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। परिसर को पूरी तरह से होर्डिंग व पर्दे से ढंक दिया गया। पुलिस बेवजह भीड़ लगाने वालों को हटाती रही। सर्वे की कार्यवाही के दौरान मैदागिन से गौदौलिया तक नो व्हीकल जोन कर दिया गया था और दोपहिया तथा साइकिल सवारों को भी भी पुलिस ने चौराहे से आगे नहीं बढ़ने दिया।
हालांकि ज्ञानवापी सर्वे के दौरान कई जगहों पर खुफिया विभाग की खामियां खुलकर सामने आ गईं। बिना किसी सूचना के परिसर में दो हजार से ज्यादा लोग जमा हो गए और पुलिस को इसकी भनक बाद में लगी। वहीं दूसरी तरफ सड़क पर धार्मिक नारेबाजी के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल खराब होने से बचा। स्थानीय लोगों के बीचबचाव से मामला शांत हुआ। क्षेत्र के आसपास की गलियों में भी लोगों का दोपहर से देर शाम तक जमावड़ा लगा रहा।
ज्ञानवापी मस्जिद से मूल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को मुक्त कराने के लिए मूल वाद दाखिल करने वाले मुख्य पक्षकार पं. हरिहर पांडेय ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से क्यों डर रहे हैं। कोर्ट ने तथ्यों की जानकारी के लिए सर्वेक्षण एवं जांच करने का आदेश दिया है। प्रतिवादी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर अकारण विवाद करना चाहते हैं जो यह किसी भी स्तर से उचित नहीं है।
हरिहर पांडेय ने कहा कि न्यायालय के न्याय पर मुझे पूर्ण विश्वास है। मैं शासन से अपील करता हूं कि न्यायालय का प्रतिरोध करने वाले के ऊपर तत्काल कानूनी एवं दंडनीय कार्रवाई की जाए। हरिहर पांडेय ने बताया कि 1991 में ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने के लिए मैंने, सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा ने मुकदमा दायर किया था। अदालत में मुकदमा दायर होने के कुछ साल बाद पं. सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा का निधन हो गया।